गोवा के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई की किताब 'भारत के पारंपरिक पेड़' के लॉन्चिंग के मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर हाशिए पर पड़े समाज के तबके के अलावा मछुआरों और किसानों पर पड़ रहा है।
अब, अक्टूबर और दिसंबर में भी बारिश होती है- CJI
सीजेआई ने यह भी कहा कि राज्य के साथ-साथ नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा, संरक्षण और सुधार के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा, मुझे बताया गया कि कल भी गोवा में बारिश हुई थी। बचपन में हमें बताया जाता था कि नारियल पूर्णिमा पर बारिश खत्म हो जाएगी, जब मछुआरे समुद्र में नारियल चढ़ाते हैं। लेकिन अब, अक्टूबर और दिसंबर में भी बारिश होती है।
जलवायु परिवर्तन से सभी वर्ग हो रहे प्रभावित- चंद्रचूड़
सीजेआई ने जोर देकर कहा, 'जलवायु परिवर्तन केवल संपन्न लोगों को ही प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि यह समाज के सबसे हाशिए पर पड़े वर्गों, जैसे मछुआरा समुदाय और किसानों को भी प्रभावित कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी प्रतिक्रिया हमारे समाज के सबसे कमजोर वर्गों की रक्षा करना होनी चाहिए। सीजेआई ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 48ए में यह अनिवार्य किया गया है कि राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करेगा तथा वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करेगा, जबकि अनुच्छेद 51ए(जी) में यह प्रावधान है कि प्रकृति की रक्षा करना, सभी जीवों के प्रति दया रखना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
'नागरिकों को भी करना चाहिए पर्यावरण संरक्षण'
राज्य और नागरिकों को मिलकर काम करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, वनों की सुरक्षा हमारे संविधान में निहित पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू है। भारत ने प्रकृति के महत्व को लंबे समय से पहचाना है। यह केवल राज्य की तरफ से किया जाने वाला काम नहीं है। बल्कि हम नागरिकों को भी यह करना होगा।
हम अतीत से मिले सीख को न खोएं- मुख्य न्यायाधीश
सीजेआई ने कहा कि संविधान में इन प्रावधानों के अलावा देश की अदालतों ने सतत विकास के सिद्धांत, प्रदूषण करने वालों को भुगतान की अवधारणा के साथ-साथ अंतर-पीढ़ीगत समानता के आधार पर स्थायी न्यायशास्त्र भी विकसित किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, अंतर-पीढ़ीगत समानता एक ऐसी चीज है जो हमारी दादी और दादाओं ने हमें सिखाई है। प्रकृति के बारे में अर्जित ज्ञान को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना। यह महत्वपूर्ण है कि हम अतीत से मिले सीख को न खोएं।
'महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का न्यायालयों में कोई स्थान नहीं'
वहीं पणजी के पास उत्तरी गोवा जिला न्यायालय परिसर के उद्घाटन के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए, सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि सभी प्रकार की अपमानजनक भाषा, विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ, का न्यायालयों में कोई स्थान नहीं है, उन्होंने कहा कि असंवेदनशील शब्द रूढ़िवादिता को बढ़ावा दे सकते हैं और महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों को असंगत रूप से प्रभावित कर सकते हैं। सीजेआई ने प्रशासनिक प्रतिष्ठान के कुछ सदस्यों की तरफ से महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल के बारे में महिला न्यायिक अधिकारियों की शिकायतों का उल्लेख किया।