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31 साल पहले भी दिल्ली पुलिस से भिड़े थे वकील, IPS किरण बेदी ने करवा दिया था लाठीचार्ज

Tue, 05 Nov 2019 04:11 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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प्रदर्शन करते दिल्ली पुलिस के कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के बाहर बीते शनिवार (2 नवंबर) को पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प का मामला बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह ताजा घटनाक्रम 31 पहले की आईपीएस किरण बेदी से जुड़ी घटना की भी यादें कर रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस.एन. ढींगरा को आज भी वो दिन याद हैं। वे बताते हैं तब कैसे और क्या हुआ था।

बहरहाल, इससे पहले बता दें कि मंगलवार को प्रदर्शन करते पुलिस कर्मचरियों से मिलने दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक पहुंचे थे, तब उन्हें अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा। दरअसल, इस दौरान 'पुलिस कमिश्नर कैसा हो, किरण बेदी जैसा हो' के नारे लगा दिए गए।

यहां किरण बेदी को लेकर नारे लगाए जाने पर 31 साल पहले पहले के एक घटनाक्रम की यादें ताजा हो गईं। तब किरण बेदी डीसीपी थीं, दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच जमकर बवाल मचा था। तमाम अदालतों को बंद करा दिया गया था।
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यहां जानिए क्या हुआ था तीस साल पहले

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delhi police protest - फोटो : पीटीआई
यह घटना 17 फरवरी 1988 की है। इस दिन डीसीपी किरण बेदी के दफ्तर में वकील पहुंचे हुए थे। इस बीच किसी बात पर बहस हो गई जो झड़प में बदल गई, इस दौरान बेकाबू भीड़ के कारण हालात ऐसे हो गए कि किरण बेदी को लाठीचार्ज कराना पड़ा। इस असर यह हुआ कि वकीलों ने दिल्ली की सभी अदालतों को बंद करा दिया। हालांकि इसके बाद भी एक न्यायाधीश ऐसे थे, जिन्होंने अपनी अदालत को खोले रखा और फैसले सुनाए।
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बवाल के बाद भी खुली रही थी इस न्यायाधीश की अदालत

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delhi police protest - फोटो : पीटीआई
बवाल वाले दिन 17 फरवरी 1988 को याद करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एस.एन. ढींगरा बताते हैं कि उस दिन डीसीपी दफ्तर में वकीलों की वजह से हालात बेकाबू हो गए थे, ऐसे में नौबत लाठीचार्ज तक आ पहुंची थी। उन्होंने कहा कि जब तक हालात बेकाबू न हो कोई पुलिस अधिकारी लाठीचार्ज नहीं कराता। आखिर वह बैठे-बिठाए मुसीबत क्यों मोल लेना चाहेगा। 

उन्होंने कहा कि आईपीएस किरण बेदी के वकीलों पर लाठीचार्ज कराने के विरोध में दिल्ली हाईकोर्ट सहित राज्य की तमाम अदालतों में ताले पड़ गए थे। हालांकि मैंने अपनी अदालत को बंद नहीं होने दिया और बवाल होते रहने के बावजूद फैसले सुनाए। 

इस कोर्ट में बैठते थे न्यायाधीश ढींगरा

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delhi police protest - फोटो : एएनआई
जज ढींगरा ने बताया कि उस वक्त वह वैवाहिक न्यायालय (मेट्रोमोनियल कोर्ट) में बैठते थे। बवाल मचने के बाद मेरी अदालत को खुला देख विरोध कर रहे वकील आए और अदालत बंद करने को कहा। हड़ताली वकीलों को मैंने दो टूक बता-समझा दिया कि हड़ताल वकीलों की है अदालतों की नहीं। बस इसके बाद फिर कोई हड़ताली वकील मेरी अदालत बंद कराने नहीं आया। हालांकि इसके बाद भी बवाल थमा नहीं था, तब दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया।
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जब दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर दिया फैसला

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दिल्ली पुलिस को याद आईं किरण बेदी - फोटो : पीटीआई/एएनआई
पूर्व न्यायाधीश ढींगरा ने बताया कि किरण बेदी और उनके मातहत पुलिसकर्मियों से पिटे हड़ताली वकीलों के बवाल और बढ़ती अटपटी हरकतों के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतत: मामले का स्वत: संज्ञान लिया। हाईकोर्ट की 13-12 के अनुपात में बैठी जजों की दोनों बेंच ने अपना फैसला वकीलों के पक्ष में सुना दिया। बस इस फैसले के बाद वकील ऐसे बेकाबू हुए, जो आज तक सबके सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि दरअसल यह सब दादागिरी और चौधराहट का चक्कर था।
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इस ताजा विवाद की आखिर वजह क्या है

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दिल्ली पुलिस कर रही प्रदर्शन - फोटो : एएनआई
दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच ताजा विवाद कुछ इस तरह शुरू हुआ था। दरअसल बीते शनिवार (2 नवंबर) दोपहर बाद उत्तरी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट परिसर में लॉकअप के बाहर कार पार्क करने को लेकर वकीलों और पुलिस के बीच बहस हो गई। जो कुछ देर बाद बवाल में तब्दील हो गई। गुस्साए वकीलों ने पुलिसकर्मियों को घेरकर उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी।

इसके बाद वकीलों की भीड़ बढ़ती देख पुलिसकर्मियों ने भी हवा में गोली चला दी। वकीलों का कहना है कि एक गोली उनके साथी के सीने में लग गई। इससे गुस्साए वकीलों ने पुलिसकर्मियों को पीट दिया। इसके साथ ही कोर्ट परिसर में खड़ी एक जिप्सी और 13 बाइकों सहित 17 वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

पूरे मामले में एक एडीसीपी, दो एसएचओ सहित 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। जबकि वकीलों ने अपने आठ साथियों के घायल होने की बात कही है। देर शाम तक कोर्ट परिसर में तनाव का माहौल था।
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