भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त सात नए न्यायाधीशों का बुधवार को स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जब न्यायाधीश एक स्वर में, सामूहिक विवेक और समझ के साथ काम करते हैं, तो संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भी मजबूत होती है। सीजेआई ने कहा कि जब वह इन नए न्यायाधीशों से बातचीत करते हैं, तो उन्हें उनके कानून और संविधान के गहन ज्ञान के साथ-साथ संस्था और आम आदमी के हित के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती है।
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उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की तुलना एक विशाल गुम्बदनुमा संरचना से करते हुए कहा, 'हर न्यायाधीश उस संरचना का एक अलग पत्थर है, जिसे अलग-अलग अनुभवों और इतिहास ने आकार दिया है। हम सबकी अलग-अलग ताकतें ही इस इमारत को संतुलित रखती हैं। अगर एक भी पत्थर हटे, तो संतुलन बिगड़ सकता है।'
इन सात जजों को किया गया सम्मानित
यह बात उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से आयोजित एक सम्मान समारोह में कही। इस अवसर पर जिन सात न्यायाधीशों को सम्मानित किया गया, उनमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस एन. वी. अंजारिया, जस्टिस विजय बिश्नोई, जस्टिस ए. एस. चंदूरकर, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं। सीजेआई ने मुस्कराते हुए कहा, 'आप इन्हें 'सप्तऋषि' कहें या सात रत्न, मुझे इस प्रतिष्ठित न्यायाधीश मंडली का हिस्सा बनकर गर्व हो रहा है।'
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि समारोह में सभी न्यायाधीशों ने अलग-अलग शब्दों में बात रखी, लेकिन आवाज एक ही थी, संविधान, संवैधानिक नैतिकता और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता। उन्होंने वर्ष 2025 के समापन की ओर इशारा करते हुए कहा, 'साल के अंत में जब हम 'क्या खोया, क्या पाया' पर विचार करते हैं, तो यह हमें आने वाले वर्ष में साफ सोच और बड़े दिल के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है।'
'न्यायपालिका और वकील समुदाय के बीच तालमेल बेहद जरूरी'
इस समारोह में बोलते हुए जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि न्यायपालिका और वकील समुदाय के बीच तालमेल बेहद जरूरी है, ताकि न्याय समाज के सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने कहा, 'हम सब न्यायाधीश बनने से पहले वकील रहे हैं। अगर बेंच और बार मिलकर काम करें, तो ही न्याय का वास्तविक फल अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।'
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स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला- पंचोली
जस्टिस विपुल पंचोली ने कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा, 'न्यायपालिका की असली ताकत उसकी शक्ति में नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता में है, उस भरोसे में, जो जनता उसकी निष्पक्षता पर करती है।' इस कार्यक्रम में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी अपने विचार रखे।