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CJI: 'बार आपका इंतजार कर रहा है', महिला वकील की याचिका खारिज कर सीजेआई सूर्यकांत ने सुनाया दिलचस्प निजी किस्सा

Fri, 08 May 2026 03:36 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट में एक न्यायिक सेवा अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने शुरुआती संघर्षों का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक वरिष्ठ न्यायाधीश की सलाह ने उन्हें न्यायिक सेवा की बजाय वकालत का रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया।
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सीजेआई सूर्यकांत - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को अदालत में एक दिलचस्प निजी अनुभव साझा करते हुए न्यायिक सेवा अभ्यर्थी को भविष्य के लिए प्रेरित किया। दरअसल, न्यायिक सेवा परीक्षा की अभ्यर्थी प्रेरणा गुप्ता अपनी उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। हालांकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी, लेकिन सुनवाई के दौरान सीजेआई ने अपना निजी अनुभव साझा कर माहौल को भावुक बना दिया।
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सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि जब वह कानून की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने भी न्यायिक सेवा के लिए आवेदन किया था। उस समय अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन कर सकते थे। उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया में बदलाव के बाद हाई कोर्ट के जजों की राय निर्णायक हो गई थी।

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सीजेआई ने बताया कि उसी दौरान उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की थी। इंटरव्यू पैनल में शामिल एक वरिष्ठ न्यायाधीश उन्हें पहले से जानते थे, क्योंकि वह उनके समक्ष दो महत्वपूर्ण मामलों में बहस कर चुके थे।

न्यायाधीश ने कक्ष से निकाल दिया था बाहर
सीजेआई ने बताया कि एक दिन उस न्यायाधीश ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाकर पूछा कि क्या वह न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हैं। उनके 'हां' कहने पर न्यायाधीश ने तुरंत उन्हें बाहर जाने को कह दिया। सीजेआई ने कहा कि उस वक्त उन्हें लगा कि उनके सारे सपने टूट गए हैं और उनका करियर खत्म हो गया।

हालांकि अगले दिन वही न्यायाधीश फिर मिले और उन्होंने सलाह दी कि अगर वह न्यायाधीश बनना चाहते हैं तो बन सकते हैं, लेकिन बेहतर होगा कि वह वकालत जारी रखें क्योंकि ''बार उनका इंतजार कर रही है।''
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वकालत पर ध्यान केंद्रित करने की मिली थी सलाह
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि इसके बाद उन्होंने इंटरव्यू में शामिल न होने का फैसला किया और पूरी तरह वकालत पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अदालत में मौजूद याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उनका वह फैसला गलत था। साथ ही उन्होंने अभ्यर्थी को भविष्य में उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा देने और आगे बढ़ने की सलाह दी। याचिका खारिज होने के बावजूद प्रेरणा गुप्ता अदालत से मुस्कुराते हुए बाहर निकलीं।

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