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SC: चुनावी बॉन्ड की सुनवाई में दखल दे रहे वकील को सीजेआई की फटकार, कहा- मुझ पर चिल्लाइये मत; पढ़ें पूरी खबर

Tue, 19 Mar 2024 06:09 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चुनावी बॉन्ड योजना पर सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील आदीश सी अग्रवाल के उस पत्र का संज्ञान लेने से मना कर दिया, जिसमें चुनावी बॉन्ड के खुलासे से संबंधित फैसले का स्वत: संज्ञान लेते हुए समीक्षा की मांग की गई थी। 
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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चुनावी बॉन्ड पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने वरिष्ठ वकील मैथ्यू नेदुम्पारा को बार-बार टोकने और जोर से बोलने पर फटकार लगाई। दरअसल नेदुम्पारा इस मामले की सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप करना चाहते थे और उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इस देश की जनता की पीठ के पीछे बॉन्ड मामले में फैसला सुनाया है। यह नीतिगत मामला था और कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए था। इसलिए देश की जनता को ऐसा महसूस हो रहा है कि फैसला उसकी पीठ के पीछे दिया गया है।

पीठ के जजों की ओर से इसपर आपत्ति जताए जाने के बावजूद नेदुम्पारा लगातार बोलते रहे और उनकी आवाज तेज भी हो गई। इसपर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, मुझपर चिल्लाइये मत। आप याचिका देना चाहते हैं तो याचिका दायर कीजिए। चीफ जस्टिस के रूप में आप मेरा फैसला सुन चुके हैं। हम आपको नहीं सुन रहे हैं। यदि आप अपील करना चाहते हैं तो ईमेल करिये। यही इस कोर्ट का नियम है। नेदुम्पारा इसके बाद भी नहीं रुके तो पीठ के एक अन्य जज जस्टिस बीआर गवई ने कहा, आप न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। क्या आपको मानहानि का नोटिस चाहिए। 

फैसले का स्वत: संज्ञान लेते हुए समीक्षा की मांग ठुकराई

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चुनावी बॉन्ड योजना पर सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील आदीश सी अग्रवाल के उस पत्र का संज्ञान लेने से मना कर दिया, जिसमें चुनावी बॉन्ड के खुलासे से संबंधित फैसले का स्वत: संज्ञान लेते हुए समीक्षा की मांग की गई थी।  चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, वरिष्ठ वकील होने के अलावा आप सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। आप प्रक्रिया जानते हैं। आपने पत्र लिखकर मुझसे इस मामले में स्वत: संज्ञान न्यायक्षेत्र का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। इसके लिए विशेष स्थिति क्या है? ये सिर्फ प्रचार पाने के हथकंडे हैं। हम इसकी इजाजत नहीं देंगे। मुझे इस बारे में और कुछ कहने के लिए बाध्य न करें। यह बेहद अरुचिकर है। 

12 अप्रैल, 2019 से पहले के विवरण का खुलासा नहीं

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हालांकि, कोर्ट ने 2018 में चुनावी बॉन्ड योजना के लॉन्च के बाद से 12 अप्रैल, 2019 के बीच जारी किए गए सभी बॉन्डों का खुलासा करने की मांग से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को लेकर 13 अप्रैल, 2019 को अंतरिम आदेश पारित किया था। पीठ ने कहा, हमने सचेत निर्णय लिया था कि कट-ऑफ तारीख अंतरिम आदेश की तारीख होनी चाहिए।

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