मोदी सरकार का एक राष्ट्र एक पहचान का स्लोगन करो या मरो की स्थिति बना हुआ है। और इसकी सफलता और असफलता दीपक मिश्रा के आने वाले इस फैसले पर निर्भर करती है। अब देखना यह है कि क्या आधार पर आने वाला फैसला गरीबों को आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित करता है।
इसी हफ्ते सबरीमाला मंदिर पर भी अपना फैसला सुनाएंगे। परंपरा के अनुसार इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित बताया गया है क्योंकि इस दौरान महिलाएं माहवारी से गुजरती हैं और ऐसी मान्यता है कि इस दौरान महिलाओं को किसी भी शुभ और पूजन कार्य में सम्मलित नहीं किया जा सकता है। दूसरा अहम फैसला सरकारी कर्मचारियों में जाति धर्म के नाम पर आरक्षण और प्रमोशन पर आना है।
इसके साथ ही जिन राजनीतिज्ञों पर किसी न किसी तरह के अपराध का आरोप लगा है ऐसे राजनेता के जीवन का फैसला भी दीपक मिश्रा जाते-जाते सुनाने वाले हैं। बता दें कि फिलहाल ऐसे आपराधिक मामलों में लिप्त राजनीतिज्ञ छह वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। फिलहाल मांग यह है कि जघन्य अपराध के मामले जिन नेताओं पर दर्ज है उनके चुनाव लड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए।