सीजेआई ने यह टिप्पणी उस वक्त की कि जब दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उक्त फैसले का हवाला दिया और कहा कि उन्होंने ऐसा कहीं और नहीं पढ़ा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2018 के फैसले में पहली बार इस अभिव्यक्ति का इस्तेमाल किया गया था।
चीफ जस्टिस (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा कि उन्होंने महिलाओं को उचित मान्यता देने के लिए दिल्ली-केंद्र सरकार के बीच सेवाओं के नियंत्रण पर 2018 की संविधान पीठ के फैसले में ‘संविधान के संस्थापक पिता और माता’ अभिव्यक्ति का इस्तेमाल किया था क्योंकि महिलाओं ने भी संविधान का मसौदा तैयार करने में अपना योगदान दिया था।
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सीजेआई ने यह टिप्पणी उस वक्त की कि जब दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उक्त फैसले का हवाला दिया और कहा कि उन्होंने ऐसा कहीं और नहीं पढ़ा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2018 के फैसले में पहली बार इस अभिव्यक्ति का इस्तेमाल किया गया था। सीजेआई ने कहा कि दक्षिणायनी वेलायुद्धन जैसी अन्य उत्कृष्ट महिलाएओं ने वास्तव में संविधान का मसौदा तैयार करने में अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि भले ही इन महिलाओं के प्रतिष्ठित पति भी थे लेकिन उनकी अपनी पूरी पहचान थी। उन्होंने अपने फैसले में इनका इसलिए जिक्र किया था ताकि उन्हें उचित मान्यता मिल सके।