भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने मुकदमेबाजी के अलावा विवाद समाधान के एक तरीके के रूप में ऑनलाइन मध्यस्थता सहित मध्यस्थता को अपनाने और प्रोत्साहित करने की शुक्रवार को वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे अदालतों का केस लोड कम होगा और यह न्याय को विरोधात्मक के बजाय सहयोगी के रूप में चित्रित करने की क्षमता रखता है।
सीजेआई ने कहा कि यह विशेष रूप से हाशिए के समुदायों की महिलाओं की सहायता के लिए आगे आएगा क्योंकि मध्यस्थता कानून के भय को खत्म करती है और कानून से दूरी को कम करती है। उन्होंने कहा कि जब सरकार, जो सबसे बड़ी मुकदमेबाज है, लेकिन उसे "दोस्त का चोला धारण करना चाहिए और इस प्रक्रिया का विकल्प चुनना चाहिए, जिससे लोगों में एक संदेश जाएगा कि सरकार स्वयं एक विरोधात्मक विरोधी नहीं है।
सीजाआई चंद्रचूड़ दिल्ली हाईकोर्ट में 'समाधान' द्वारा आयोजित "मध्यस्थता की शुरुआत में स्वर्ण युग" पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।समाधान या दिल्ली हाईकोर्ट मध्यस्थता और सुलह केंद्र की स्थापना मई 2006 में वैकल्पिक विवाद समाधान के एक उपयुक्त तरीके के रूप में मध्यस्थता प्रदान करने के लिए की गई थी।
सत्र के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने पहाड़ी राज्य में मध्यस्थता प्रक्रिया का विस्तार करने के संबंध में उत्तराखंड हाईकोर्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सीजेआई ने कहा, हम मध्यस्थता के स्वर्ण युग की शुरुआत में खड़े हैं। मध्यस्थता को केवल एक वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता नागरिकों को न केवल उनके विवादों के परिणामों को निर्धारित करने के लिए एक मंच प्रदान करती है, बल्कि उन मानदंडों और मानकों को भी निर्धारित करती है जिनके द्वारा उन परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है.... मध्यस्थता में न्याय को समझने के तरीके को बदलने की क्षमता होती है। दूसरे शब्दों में कहे तो मध्यस्थता अदालतों को डी-क्लॉग करने के लिए एक आंदोलन से कहीं अधिक है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि ऑनलाइन विवाद समाधान तंत्र को रणनीतिक रूप से अपनाने से भारत सरकार को लाभ होगा। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा, अन्य हाईकोर्ट के न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति मनमोहन और संजीव सचदेवा, अटॉर्नी जनरल (एजी) आर वेंकटरमणि और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
सीजेआई ने कहा कि महिलाएं, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों से संबंधित, अक्सर औपचारिक कानूनी कार्यवाही से खुद को अलग-थलग पाती हैं। ऐतिहासिक रूप से समान स्तर पर कानून तक पहुंचने से उन्हें रोका गया है। इस अलगाव को कम करने के लिए मध्यस्थता जैसे विवाद समाधान तंत्र, जहां पार्टियां अपनी शिकायतों को सीधे व्यक्त करती हैं, कानून को कम डराने वाला बनाने के लिए एक कदम आगे बढ़ाएं।