वरिष्ठ वकील व पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर 'मास्टर ऑफ रोस्टर’ को भारत के प्रधान न्यायाधीश के प्रशासनिक अधिकार को स्पष्ट करने की गुहार लगाई है। साथ ही याचिका में गुहार की गई है कि रोस्टर के तहत मामलों को किसी पीठ के पास भेजने का सिद्धांत व प्रक्रिया तय की जानी चाहिए।
शांति भूषण ने यह याचिका अपने बेटे व वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर की है। प्रशांत भूषण ने साथ ही
सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को पत्र लिखकर कहा है कि यह याचिका चीफ जस्टिस केसमक्ष लिस्ट न किया जाए। मालूम हो कि गत 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कांफ्रेस कर रोस्टर सिस्टम पर आपत्ति जताई थी। चार वरिष्ठ जजों ने प्रधान न्यायाधीश द्वारा महत्वपूर्ण मामले को कुछ चुनिंदा पीठ केपास भेजने पर आपत्ति जताई थी।
पत्र में सेक्रेटरी जनरल से यह भी कहा कि बेहतर होगा कि याचिका सुप्रीम कोर्ट के तीन वरिष्ठ जजों केपास लिस्ट किया जाए। उसके बाद उचित पीठ केपास भेजा जाए। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के साथ-साथ चीफ जस्टिस को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
शांति भूषण ने अपनी याचिका में कहा है कि मास्टर ऑफ रोस्टर का अधिकार अनियंत्रित और स्वच्छंद नहीं हो सकता। भारत के प्रधान न्यायाधीश इस अधिकार का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं कर सकते। उन्होंने वरिष्ठ जजों से सलाह लेनी चाहिए।