जस्टिस दीपक मिश्रा 12 जनवरी से कांग्रेस के कुछ छिपे हुए और कुछ खुले हमलों के निशाने पर रहे हैं, जब एक अप्रत्याशित घटना में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने न्यायपालिका के मुखिया की आलोचना करने वाला कदम उठाया।
चीफ जस्टिस पर उनके सहयोगियों के हमले को कांग्रेस ने एक मौके की तरह लिया और उन्हें हटाने के लिए एक अभियान शुरू करने के लिए इसका हवाला दिया। हालांकि, सीजेआई ने कर्नाटक में बीजेपी सरकार के गठन पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के लिए कांग्रेस की याचिका का तेजी से जवाब दिया। कई लोग यह सोच रहे हैं कि क्या उनके हस्तक्षेप ने कर्नाटक में सत्ता के खेल का पासा पलट दिया - जिसके बाद विपक्षी पार्टी की शत्रुता कुछ हद तक कम हुई हो।
मास्टर ऑफ रोस्टर की अपनी भूमिका निभाते हुए, सीजेआई ने गुरुवार को कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन की याचिका पर मध्यरात्रि में सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ गठित की, जिसने अंततः उसके राजनीतिक भाग्य को बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने बुधवार रात 11.40 बजे याचिका को मंजूरी दे दी, जो गुरुवार को मध्य रात्रि 12.10 बजे सीजेआई मिश्रा के निवास पर पहुंच गई।
रजिस्ट्री को न्यायाधीशों के चयन और उनकी सहूलियत को देखते हुए याचिका को सूचिबद्ध करने के लिए सीजेआई के आदेश की आवश्यकता थी। कांग्रेस के वकीलों के मुताबिक राज्य में सरकार बनाने के लिए राज्यपाल के भाजपा को बुलाने के मद्देनजर कोई देरी नहीं की जा सकती थी।
सीजेआई ने बहुत तेजी से कागजातों का अध्ययन किया और मध्यरात्रि 12.20 बजे रजिस्ट्रार जनरल रविंद्र मैथानी से तीन न्यायाधीशों - जस्टिस एके सीकरी, एसए बॉबडे और अशोक भूषण से संपर्क साधने और याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए कहा।
तीनों न्यायाधीशों की तारीफ की जानी चाहिए कि उनमें से किसी ने भी सुप्रीम कोर्ट में आधी रात को सुनवाई के लिए मना नहीं किया। मैथानी ने न्यायाधीशों की सहमति लेकर सीजेआई को बताया कि वे 1.45 बजे याचिका सुनेंगे। न्यायालय संख्या 6 खोलने की व्यवस्था की गई। कक्ष और अदालत में न्यायाधीशों की सहायता के लिए फेरी स्टाफ और कोर्ट मास्टर भी पहुंचे।
युद्धस्तर पर की गई व्यवस्था के बावजूद सुनवाई रात 2.10 बजे शुरू हो पाई। रजिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि सीजेआई रजिस्ट्रार जनरल के साथ लगातार संपर्क में थे। सूत्रों ने कहा कि जब तक सुनवाई चल रही नहीं थी तब तक सीजेआई सोये नहीं। परिस्थिति की जरूरत को देखते हुए वह किसी भी न्यायाधीश के विकल्प नामित करने के लिए भी तैयार थे। अगर सीजेआई ने याचिका पर सुनवाई को गुरुवार तक स्थगित कर दी होती, तो बीजेपी को प्रतिद्वंद्वी विधायकों पर "काम करने" का समय मिल जाता।
रजिस्ट्री सूत्रों ने कहा कि जब कांग्रेस-जेडी (एस) की प्रो टेम्पर स्पीकर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को शुक्रवार सुबह 8.30 बजे सीजेआई के सामने आई थी, तब उन्होंने इसे तुरंत उसी बेंच के सामने भेज दिया था, जिसने रात 9.45 बजे इसकी सुनवाई शनिवार के लिए तय की थी।