किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन, जो कि धारा 144 तोड़कर किया गया हो, तो वहां पुलिस उन्हें हिरासत में ले लेती है। यदि प्रदर्शनकारियों की संख्या सौ से कम है, तो उन्हें आसपास के थाने में ले जाकर बैठा दिया जाता है। बड़ा प्रदर्शन है यानी कि जिसमें हजारों लोग शामिल है और वह भी एक जगह पर नहीं, बल्कि अनेक क्षेत्रों में होता है, तो पुलिस उन लोगों को पकड़कर कर खुले आसमान वाली जेल में ले जाती है। ऐसे लोगों के लिए पुलिस पहले से ही वाहनों का इंतजाम कर लेती है। जैसे ही गाड़ी भरती जाती है, उसे अस्थायी जेल की ओर रवाना कर देते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी के प्रदर्शनकारियों को आमतौर पर अस्थायी जेल यानी बवाना स्थिति राजीव स्टेडियम, मॉडल टाउन में अंबेडकर स्टेडियम और नांगलोई में सूरजमल स्टेडियम में ले जाकर बैठा दिया जाता है। स्टेडियम के चारों ओर पुलिस का पहरा रहता है। केवल एक गेट को आने-जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, बाकी गेट बंद कर दिए जाते हैं। अगर प्रदर्शनकारियों की संख्या कम है यानी दो तीन सौ है, तो वे स्टेडियम में अपनी मनमर्जी से इधर-उधर घूम सकते हैं। हालांकि देर शाम तक पुलिस उन्हें छोड़ देती है, लेकिन कई बार जब कानून व्यवस्था की गंभीर स्थिति होती है, तो प्रदर्शनकारियों को रात एक दो बजे तक खुली जेल मतलब स्टेडियम में रखा जा सकता है।
पुलिस की ओर प्रदर्शनकारियों को खाने के लिए कुछ नहीं दिया जाता। बाहर से उनके समर्थक कुछ खाने-पीने का सामान लाते हैं, तो उसे स्टेडियम में बैठे लोगों तक पहुंचा दिया जाता है। स्टेडियम में रखे गए किसी प्रदर्शनकारी से अगर कोई मिलने आता है तो वह गेट के भीतर से ही उसके साथ बात कर सकता है।
प्रदर्शनकारियों को जब हिरासत में लिया जाता है, तो पुलिस अपने वाहनों में बैठाकर उन्हें स्टेडियम तक पहुंचाती है। बाद में शाम को या देर रात जब उन्हें छोड़ा जाता है, तो पुलिस उनके लिए गाड़ी की व्यवस्था नहीं करती है। प्रदर्शनकारियों को अपने खर्च पर ही वाहन का जुगाड़ करना पड़ता है। यदि उस इलाके में मेट्रो जाती है तो उन्हें कुछ राहत महसूस होती है।
बवाना जैसे इलाके में, जहां अभी मेट्रो नहीं पहुंची है, वहां ऐसे लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है, जो कि जेब पर अच्छा खासा बोझ डालती है। प्राइवेट वाहन वाले भी रात के समय दो तीन हजार रुपये मांगते हैं। अगर वे किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता हैं तो उन्हें कई दफा बस की सुविधा मिल जाती है। गुरुवार को नागरिकता कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, उन्हें बवाना और सूरजमल स्टेडियम में भेजा गया था। बवाना में करीब सौ व्यक्ति और सूरजमल में दो सौ से अधिक लोगों को रखा गया है।