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नागरिकता संशोधन बिल पर जोरदार बहस, गृह मंत्री अमित शाह की 10 बड़ी बातें 

Mon, 09 Dec 2019 06:31 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : ANI
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सदन को बताया कि आखिर वह इस बिल को क्यों लेकर आए हैं। साथ ही अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए उन पर निशाना साधा। इस दौरान अमित शाह ने क्या क्या कहा, जानिए 10 बड़ी बातें। 

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  • मुझे भी तो बोलने का मौका दो। 18 लाख लोगों ने मुझे भी चुना है, मुझे कैसे नहीं सुनोगे। बदलाव को हम स्वीकार करते हैं, अपनी संस्कृति में समाहित करते हैं। ये बिल उसी को प्रतिबिंबित करता है। 2014 और 2019 में हमने घोषणापत्र में इसका जिक्र किया था।
  • सरकार का कर्तव्य है कि देश की सुरक्षा करे। घुसपैठियों की पहचान करे, क्या देश को सबके लिए खुला छोड़ देंगे? इस विधेयक में किसी के साथ अन्याय की बात पूरी तरह गलत है। इसके पीछे कोई एजेंडा नहीं है। 
  • दुनिया में ऐसा कौन सा देश है जिसने अपनी सीमाओं और देश की सुरक्षा के लिए नागरिकता का कानून नहीं बनाया है? हमने भी ऐसा कानून बनाया है। हमने एकल नागरिकता का प्रावधान किया है।
  • बांग्लादेश के गठन के बाद भी शरणार्थियों को नागरिकता दी गई और हमारी पार्टी समेत किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया। क्या बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को विशेष तवज्जो मिलनी चाहिए? पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों को विशेष तवज्जो नहीं मिलनी चाहिए? 
  • युगांडा में भारतीयों को निकाला गया, उन्हें नागरिकता मिली, श्रीलंका संकट के दौरान भी नागरिकता दी गई। किसी ने विरोध नहीं किया, हमने भी नहीं किया। करोड़ों लोग इस समय पीड़ित हैं। 
  • बंगाल और कांग्रेस सांसद यह साबित कर दें कि यह विधेयक किसी के अधिकार छीनने के लिए है, तो मैं बिल वापस लेकर चला जाऊंगा। यह बिल अधिकार को छीनने नहीं बल्कि अधिकार देने का बिल है।
  • भारत के संविधान ने 1947 में सभी शरणार्थियों को स्वीकार किया। मनमोहन सिंह और लालकृष्ण आडवाणी भी इस समूह का हिस्सा हैं। वह प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री बने क्योंकि देश ने उनको स्वीकारा और उनको नागरिकता प्रदान की।
  • उत्तर पूर्व की संस्कृति की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। हम मणिपुर की समस्या का समाधान करेंगे। मणिपुर को इनर लाइन सिस्टम में लाएंगे।
  • हम सब पंथनिरपेक्षता को स्वीकार करते हैं, किसी के साथ भी पंथ, धर्म के आधार पर गलत व्यवहार नहीं होना चाहिए। 
  • इसकी मांग कई वर्षों से की जा रही है। हर किसी को राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर सोचना चाहिए। कोई अपनी मर्जी से अपना घर नहीं छोड़ता। धार्मिक प्रताड़ना के नाम पर उन्हें सताया गया, तभी वे अपना घर छोड़कर आए। 

क्या है नागरिकता संशोधन बिल

नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा। नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

कम हो जाएगी निवास अवधि

भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास करने वाले लोग योग्य होते हैं। नागरिकता संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान है। 
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