नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विरोध में पूरे देश में जगह-जगह पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में भारी आगजनी, हिंसा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं। इसके पीछे पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया है। पुलिस का कहना है कि शरारती तत्व सोशल मीडिया पर फर्जी संदेश प्रसारित कर देते हैं, जिससे सामान्य लोग भड़क जाते हैं।
प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बाद यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इनमें से ज्यादातर को नागरिकता संशोधन अधिनियम की सही-सही जानकारी नहीं है, लेकिन फिर भी लोगों के उकसावे में आकर वे इसके विरोध में उतर जाते हैं।
इसी प्रकार की बातचीत में यह बात सामने आई है कि लोगों के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम के बाद ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’ लाने वाली है। इसके बाद लोग एक या दो से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं कर सकेंगे। प्रदर्शनकारियों को लगता है कि यह उनकी संख्या को कम करने की एक चाल हो सकती है। यही कारण है कि लोग बिना सोचे-समझे सड़कों पर उतर रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार ने आज तक ऐसी कोई भी बात नहीं कही है जिससे इस तरह का कोई संकेत मिलता हो। यानी यह खबर पूरी तरह फर्जी है।
डिटेंशन सेंटर भेजने की अफवाह
इसी तरह की कुछ और अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि जो लोग अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाएंगे, उनके सारे अधिकार छीन लिए जायेंगे। उन्हें कोई रोजगार करने का अधिकार नहीं होगा और उन्हें ‘डिटेंशन सेंटर’ में रखा जाएगा। इन अफवाहों के साथ कुछ तस्वीरें भी जारी की जा रही हैं जो भारत की नहीं हैं। इनमें कुछ तस्वीरें अमेरिका, मेक्सिको, मध्य एशिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भागे लोगों की हैं। लेकिन लोग आसानी से इनका यकीन कर लेते हैं। इन अफवाहों के कारण एक वर्ग में भय जैसा माहौल देखा जा रहा है। लेकिन सुरक्षा बलों और सरकार ने हर स्तर पर बार-बार यह बात कही है कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है और लोग अफवाहों पर यकीन न करें।
इन अफवाहों को रोकने के लिए गुरुवार को दिल्ली की कई जगहों पर इंटरनेट सेवा रोक दी गई थी। शुक्रवार को भी कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा बाधित कर दी गई है। इसी प्रकार एनसीआर के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा को शुक्रवार रात तक के लिए रोक दिया गया है। यूपी के भी अनेक इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है।
जामिया में भी अफवाह ने लगाई थी आग
रविवार 15 दिसंबर को भी जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा के पीछे भी इसी तरह की अफवाह ने आग लगाने का काम किया था। इस दौरान जामिया के लोगों के पास इस तरह के सन्देश आये थे कि पुलिस की फायरिंग में दो से तीन छात्रों की मौत हो गई है, जबकि सच्चाई में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। बाद में पुलिस ने पाया कि इसी तरह के कई संदेश लोगों के पास भेजे गये थे जिसके कारण लोग भड़क गये थे और सड़कों पर उतर आये थे। पुलिस ने ऐसे फर्जी संदेश भेजने वालों पर कार्रवाई भी की है। सैकड़ों सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद करा दिया गया है।
आईटी एक्ट में अफवाह फैलाने पर है सजा का प्रावधान
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने पर जेल भी हो सकती है। आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 में यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने का काम करता है, तो उसके खिलाफ केस शुरू किया जा सकता है। आरोप सही पाए जाने पर इसमें जुर्माने के साथ-साथ तीन साल तक की सजा भी हो सकती है। इसलिए किसी को भी किसी खबर को सच जाने बिना कोई संदेश आगे नहीं भेजना चाहिए।