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रोजाना 1.45 लाख टन कचरा पैदा कर रहे भारत के शहर, 57 फीसदी का ही निस्तारण

Mon, 09 Dec 2019 02:59 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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देश के 93 प्रतिशत शहरी निकाय स्वच्छ भारत अभियान के जरिए घरों से रोजाना कचरा उठा रहे हैं। यहां से 1.45 लाख टन कचरा निकल रहा है, लेकिन 57 प्रतिशत ही निस्तारण हो रहा है। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने यह जानकारी संसद में दी। मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि कचरा प्रबंधन में सबसे आगे छत्तीसगढ़ है। वहीं बड़े राज्य महाराष्ट्र और यूपी बहुत पीछे छूट गए हैं। 14 राज्यों में सारे शहरी निकाय घरों से कचरा उठा रहे हैं।

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इतने शहर, इतना कचरा

  • 84000 शहरी निकाय देश में
  • 79000 निकास घरों से कचरा उठा रहे
  • 1.45 लाख टन कचरा देश में हर रोज निकल रहा
  • 57 प्रतिशत कचरा ही रिसाइकल या प्रोसेस हो रहा


बाकी कचरा कहां?
बाकी कचरा जमीन पर ही बिखरा जा रहा है, या जमीन में दफनाया जा रहा है।

यह होना चाहिए
केंद्र ने स्वच्छ भारत अभियान में 5023.96 करोड़ रुपये जारी किए गए। उसका लक्ष्य 2022 तक देश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन लागू करना है। प्रदेश सरकारों को प्लास्टिक से सड़क बनाने, सीमेंट उद्योग में उपयोग करने, आरडीएफ ईंधन तैयार करने जैसी तकनीकें दी जा रही हैं।

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ये राज्य आगे
छत्तीसगढ़ : 1,650 टन कचरा हर रोज 3,217 शहरी निकाय जमा कर रहे हैं। 90 प्रतिशत प्रोसेस हो रहा
मध्यप्रदेश : 6,424 टन कचरा 6,999 निकाय जमा कर रहे, 84 प्रतिशत का निस्तारण

फिसड्डी राज्य : सबसे ज्यादा कचरा, कम निस्तारण
महाराष्ट्र के शहरों से रोजाना 23,450 टन कचरा जमा हो रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। लेकिन निस्तारण केचल 57 प्रतिशत का हो रहा है। यूपी में 58 और तमिलनाडु में 62 प्रतिशत ही कचरा निस्तारण हो पा रहा है। पश्चिम बंगाल व जम्मू और कश्मीर में नौ, मेघालय में चार और अरुणाचल प्रदेश में शून्य प्रतिशत कचरा निस्तारण हो रहा है।

जिम्मेदारी : प्रदेश की ही
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने ठोस कचरा प्रबंधन नियमावली 2016 जारी की थी। इसके जरिए शहरों में बढ़ते कचरे के पहाड़ खत्म करने और जमीन में इन्हें भरने की समस्या रोकने का प्रयास किया गया। इसके अनुसार कचरे को जमा करने, उसके विभाजन, निस्तारण और रिसाइकल का काम प्रदेश सरकारों को ही करना है। 

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