CISF: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में कॉन्स्टेबलों और ड्राइवरों की भर्ती में महिलाओं के खिलाफ 'संस्थागत भेदभाव' का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार के वकील की ओर से यह जानकारी दी गई। मामले पर अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी। पीठ में न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद भी शामिल हैं।
केंद्र सरकार पुरुषों के बराबर सीआईएसएफ में कॉन्स्टेबल/ड्राइवर और कॉन्स्टेबल/ड्राइवर-कम-पंप ऑपरेटर (अग्निशमन सेवाओं के लिए ड्राइवर) के पद पर महिलाओं की भर्ती पर विचार कर रहा है। केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में इसकी जानकारी दी है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि इसी तरह के बदलाव अन्य अर्धसैनिक संगठनों के लिए पाइपलाइन में हैं यानी उन पर विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आठ हफ्ते का समय मांगा है।
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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में कॉन्स्टेबलों और ड्राइवरों की भर्ती में महिलाओं के खिलाफ 'संस्थागत भेदभाव' का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार के वकील की ओर से यह जानकारी दी गई। मामले पर अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी। पीठ में न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ता कुश कालरा ने 2018 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जब पाया गया कि सीआईएसएफ की ओर से जारी एक विज्ञापन में बल में कांस्टेबल/ड्राइवर और कांस्टेबल/ड्राइवर-सह-पंप ऑपरेटर के पदों के लिए केवल पुरुष उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। अधिवक्ता चारु वली खन्ना के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के मानवाधिकार अविच्छेद्य और अविभाज्य हिस्सा हैं और महिलाओं को पदों पर भर्ती नहीं करने का कोई औचित्य नहीं है।
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इससे पहले पीठ ने अपने नौ मई के आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार के स्थायी वकील यानी सीजीएससी ने इस अदालत को सूचित किया है कि सीआईएसएफ की ओर से 23 मार्च 2023 को भर्ती नियमों में संशोधन के लिए एक प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। इसमें कॉन्स्टेबल, चालक और कॉन्स्टेबल-चालक-सह-पंप ऑपरेटर (अग्निशमन सेवाओं के लिए चालक) के पद के लिए सीआईएसएफ में पुरुषों के बराबर महिलाओं की भर्ती के प्रावधान का जिक्र है।