उदय माहुरकर को अक्तूबर 2020 में केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) बनाया गया था। उन्होंने आरटीआई कानून लागू होने के बाद से किसी भी एक साल में सबसे ज्यादा आरटीआई आवेदनों का निस्तारण करने के मामले में कीर्तिमान स्थापित किया है।
केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) उदय माहुरकर ने रविवार को एक निजी और पेशेवर मील का पत्थर हासिल किया है। उन्होंने साल 2021-22 में कुल 5056 आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदनों का निस्तारण किया है। यह साल 2005 में आरटीआई कानून लागू होने के बाद से एक साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। सीआईसी के तौर पर अपने कार्यकाल के पहले साल में माहुरकर की इस उपलब्धि ने बीते 16 वर्षों के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
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पूर्व पत्रकार और लेखक माहुरकर ने एक ट्वीट में लिखा, 'बिना भय या पक्षपात के फैसलों का मील का पत्थर पार किया।' माहुरकर ने लिखा कि मैंने एक फैसले में कहा था कि एक पांडुलिपि राष्ट्रीय संपत्ति होती है, चाहे उसका मालिकाना हक सरकार के पास हो या किसी निजी इकाई के पास। भले ही वह विरासत को सुरक्षित रखने के लिए किसी निजी संस्था या व्यक्ति को दान में ही क्यों न मिली हो। इस फैसले का पूरी दुनिया के विद्वानों ने स्वागत किया था। '
माहुरकर ने आगे लिखा कि मैंने अपने फैसले में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन को निर्देश दिया था कि वह निजी निकायों की उन सभी तीन लाख पांडुलिपियों को सार्वजनिक क्षेत्र में रखे जिन्हें शोधार्थियों के लाभ के लिए डिजिटाइज किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि केवल ऐसी 28,000 पांडुलिपियां ही सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध थीं। उदय माहुरकर का कहना है कि मेरे इस फैसले का भारतविदों (इंडोलॉजिस्ट्स) ने खूब सराहना की थी और इसका स्वागत किया था।
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अपनी इस उपलब्धि को लेकर माहुरकर ने बताया कि मैंने केंद्रीय मंत्रालय के सार्वजनिक सूचना अधिकारियों के साथ समन्वय जैसे रचनात्मक कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में इन अधिकारियों की एक सामूहिक बैठक भी बुलाई गई थी। इस बैठक में अधिकारियों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई थी और उन्हें सख्त निर्देश भी दिया गया था कि आरटीआई अधिनियम के सभी उद्देश्यों की पारदर्शिता और जिम्मेदारी हर हालत में सुनिश्चित की जाए।