फिलहाल आयोग में केवल दो सूचना आयुक्त आनंदी रामालिंगम और विनोद कुमार तिवारी कार्यरत हैं, जबकि आठ पद खाली हैं। सीआईसी आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत गठित सर्वोच्च अपीलीय संस्था है। कानून के अनुसार इसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त होने चाहिए।
मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समारिया के सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) एक बार फिर प्रमुखविहीन हो गया है। यह स्थिति वर्ष 2014 के बाद छठी बार बनी है, जब आयोग के पास कोई प्रमुख नहीं है।
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समारिया ने 6 नवंबर 2023 को पद संभाला था, लेकिन 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें शनिवार को पद छोड़ना पड़ा। फिलहाल आयोग में केवल दो सूचना आयुक्त आनंदी रामालिंगम और विनोद कुमार तिवारी कार्यरत हैं, जबकि आठ पद खाली हैं।
सीआईसी आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत गठित सर्वोच्च अपीलीय संस्था है। कानून के अनुसार इसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त होने चाहिए। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से नियुक्तियों में लगातार देरी हो रही है, जिससे आयोग अधूरा बना हुआ है और अपीलीय मामलों के निपटारे की गति प्रभावित हो रही है। सूचना कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) के अनुसार, अदालतों की तरह यहां कार्यवाहक प्रमुख का प्रावधान नहीं है। ऐसे में मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली रहने से कई प्रशासनिक और वित्तीय फैसले लंबित हो जाते हैं।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते नियुक्ति
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के अनुसार, मई 2024 में मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए जारी विज्ञापन पर 83 आवेदन आए थे। वहीं अगस्त 2024 में सूचना आयुक्त पदों के लिए जारी विज्ञापन पर 161 आवेदन प्राप्त हुए। नियुक्ति प्रक्रिया के तहत नाम पहले खोज समिति को भेजे जाते हैं और फिर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। आयोग के प्रमुख पद खाली रहने से अपीलीय मामलों के निपटारे की गति भी प्रभावित होती है। पारदर्शिता कानून के तहत जानकारी मांगने वाले नागरिकों को अंतिम स्तर पर न्याय देने वाला यह संस्थान लगातार क्षमता संकट से जूझ रहा है।