चिराग पासवान ने एक तरफ चुनाव आयोग की ओर से दिए गए जवाब पर संतुष्टि जताई, तो दूसरी तरफ विपक्ष की आलोचना पर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर चुनिंदा तरीके से सवाल उठाने का आरोप लगाया। केरल, हिमाचल प्रदेश और प्रियंका गांधी की जीत का उदाहरण देते हुए उन्होंने एसआईआर पर विपक्ष के रुख को लेकर सवाल किया। यह बयान चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद पर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी भी कुछ चिंताएं थीं और उन्होंने हमेशा जनता की चिंताओं को प्राथमिकता दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने जिस तरह से पिछले दिन उठाए गए हर मुद्दे का बिंदुवार जवाब दिया, उससे वह संतुष्ट हैं।
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विपक्ष पर चुनिंदा तरीके से सवाल उठाने का आरोप
चिराग ने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह उन राज्यों को तो देखता है जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन या भाजपा की सरकार बनी है, लेकिन उन राज्यों को नहीं देखता जहां उसकी अपनी सरकारें हैं। उन्होंने सवाल किया कि केरल में उनकी सरकार कैसे बनी और हिमाचल प्रदेश में उनकी सरकार कैसे काम कर रही है। केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे की सरकार बनी है, जबकि हिमाचल में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार है।
बोले- एक जगह प्रक्रिया गलत और दूसरी जगह सही कैसे?
चिराग पासवान ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि किसी जगह चुनावी प्रक्रिया को गलत बताया जाए और दूसरी जगह उसी प्रक्रिया को सही माना जाए। उन्होंने विपक्ष से कहा कि अगर सवाल उठाने हैं तो उन्हें सही तरीके से उठाया जाना चाहिए। आलोचना में एक ही तरह का नजरिया होना चाहिए।
प्रियंका गांधी की जीत का भी दिया उदाहरण
केंद्रीय मंत्री चिराग ने विपक्ष से सवाल किया कि अगर एसआईआर इतना बड़ा मुद्दा है तो प्रियंका गांधी कैसे चुनाव जीत गईं। उन्होंने कहा कि विपक्ष उन जगहों पर चुप रहता है जहां उसके उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं। प्रियंका गांधी वर्तमान में केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं।
एसआईआर को लेकर विवाद क्यों?
चिराग की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच चिराग ने पहले भी कहा था कि आयोग को लोगों के मन में पैदा हो रहे संदेह दूर करने के लिए अपनी स्थिति साफ तौर पर रखनी चाहिए। एनडीए के कुछ अन्य सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग की थी।