बीती छह जुलाई को कुछ चीनी सैनिक और कुछ नागरिक लद्दाख के डेमचुक इलाके में सिंधु नदी की दूसरी ओर देखे गए थे। जानकारी के अनुसार यह घटना तब की है जब भारतीय ग्रामीण बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिवस मना रहे थे। इसके विरोध में चीनियों ने बैनर और अपना राष्ट्रीय ध्वज लहराया।
सूत्रों के अनुसार, डेमचुक के पास डोला तामगो स्थित कोयुल गांव में कुछ गांव वाले छह जुलाई को दलाई लामा का जन्मदिन समारोह मना रहे थे। तभी चीनी सैनिक और कुछ नागरिक पांच वाहनों में आए। उन लोगों ने जहां जन्मदिन समारोह मनाया जा रहा था, वहां से करीब 200 मीटर की दूरी पर बैनर दिखाए।
बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने दलाई लामा से बात की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था कि दलाई लामा से फोन पर बात की और उनके 86वें जन्मदिवस की बधाई दी। हम उनकी लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।
इसके बाद पीएम ने शनिवार को वियतनाम के फाम मिन्ह चीन्ह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। वियतनाम और चीन के बीच समुद्री इलाकों को लेकर अरसे से विवाद है। इसके अलावा भारत सरकार ने हाल ही में चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर भी बधाई नहीं दी थी।
उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के चलते पिछले साल अप्रैल-मई से ही दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इस मुद्दे के समाधान के लिए दोनों पक्ष सैन्य व राजनयिक, दोनों स्तर पर कई दौर की वार्ताएं कर चुके हैं, पर अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है।
चीन की नई चाल पर भारत भी देगा जवाब
सूत्रों के मुताबिक, भारत के इस मुखर रवैैये पर चीन आने वाले दिनों में नई कूटनीतिक पैंतरेबाजी कर सकता है। चीन ऐसा करता है तो भारत भी उसी अनुपात में अपनी प्रतिक्रिया देगा।
कोरोना से हालात सुधरने के बाद मोदी-दलाई लामा की मुलाकात संभव
2014 के बाद पीएम की तरफ से पहली बार दलाई लामा से बातचीत का खुल कर एलान किया गया। कूटनीतिक स्तर पर इसे भारत का चीन के प्रति अब तक की नीति में बदलाव माना जा रहा है। शीर्ष सरकारी स्तर पर चर्चा है कि कोविद के हालात सुधरने के बाद पीएम मोदी और दलाई लामा मुलाकात कर सकते हैं।