फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लद्दाख: डेमचुक में घुस आए थे चीनी सैनिक, दलाई लामा के जन्मदिन का किया विरोध

Mon, 12 Jul 2021 08:06 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

छह जुलाई को तिब्बत के बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा का जन्मदिन था। इस दिन बड़ी घटनाएं हुईं। पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दलाई लामा को जन्मदिन की बधाई दी। फिर दुनिया के तमाम राष्ट्राध्यक्षों ने उन्हें बधाई दी। दूसरी घटना डेमचुक में हुई। यहां स्थानीय लोगों ने दलाई लामा का जन्मदिन मनाया। चीन की बौखलाहट नजर आने लगी। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने सिंधु नदी के पास बैनर, झंडे सब गाड़ दिया और डेढ़ से दो घंटे तक यही स्थिति रही।
विज्ञापन
PLA china Army
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीती छह जुलाई को कुछ चीनी सैनिक और कुछ नागरिक लद्दाख के डेमचुक इलाके में सिंधु नदी की दूसरी ओर देखे गए थे। जानकारी के अनुसार यह घटना तब की है जब भारतीय ग्रामीण बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिवस मना रहे थे। इसके विरोध में चीनियों ने बैनर और अपना राष्ट्रीय ध्वज लहराया।  

विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार, डेमचुक के पास डोला तामगो स्थित कोयुल गांव में कुछ गांव वाले छह जुलाई को दलाई लामा का जन्मदिन समारोह मना रहे थे। तभी चीनी सैनिक और कुछ नागरिक पांच वाहनों में आए। उन लोगों ने जहां जन्मदिन समारोह मनाया जा रहा था, वहां से करीब 200 मीटर की दूरी पर बैनर दिखाए।

बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने दलाई लामा से बात की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था कि दलाई लामा से फोन पर बात की और उनके 86वें जन्मदिवस की बधाई दी। हम उनकी लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।
विज्ञापन


इसके बाद पीएम ने शनिवार को वियतनाम के फाम मिन्ह चीन्ह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। वियतनाम और चीन के बीच समुद्री इलाकों को लेकर अरसे से विवाद है। इसके अलावा भारत सरकार ने हाल ही में चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर भी बधाई नहीं दी थी।

उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के चलते पिछले साल अप्रैल-मई से ही दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इस मुद्दे के समाधान के लिए दोनों पक्ष सैन्य व राजनयिक, दोनों स्तर पर कई दौर की वार्ताएं कर चुके हैं, पर अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है।

चीन की नई चाल पर भारत भी देगा जवाब
सूत्रों के मुताबिक, भारत के इस मुखर रवैैये पर चीन आने वाले दिनों में नई कूटनीतिक पैंतरेबाजी कर सकता है। चीन ऐसा करता है तो भारत भी उसी अनुपात में अपनी प्रतिक्रिया देगा।

कोरोना से हालात सुधरने के बाद मोदी-दलाई लामा की मुलाकात संभव
2014 के बाद पीएम की तरफ से पहली बार दलाई लामा से बातचीत का खुल कर एलान किया गया। कूटनीतिक स्तर पर इसे भारत का चीन के प्रति अब तक की नीति में बदलाव माना जा रहा है। शीर्ष सरकारी स्तर पर चर्चा है कि कोविद के हालात सुधरने के बाद पीएम  मोदी और दलाई लामा मुलाकात कर सकते हैं।

विज्ञापन

दलाई लामा के नाम पर ही परेशान हो जाता है चीन 

रक्षा और विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार का कहना है कि चीन दलाई लामा के नाम पर, उइगर मुसलमानों के नाम पर बहुत संवेदनशील रहता है। हालांकि भारत ने दलाई लामा को केवल शरण दी है। यहां से उन्हें या तिब्बती लोगों को राजनीतिक गतिविधियां चलाने की इजाजत नहीं है। लेकिन जब भी कुछ होता है, चीन की परेशानी बढ़ जाती है। चीन कभी नहीं चाहता कि दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश जाएं। अरुणाचल प्रदेश में तवांग जाएं। 

दलाई लामा से चीन के भड़कने की वजह क्या है?
छह जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर में जन्मे तेनजिन ग्यात्सो (दलाई लामा) 86 साल के हो गए हैं। 13वें दलाई लामा के चीन को स्वतंत्र घोषित करने के बाद चीन ने तिब्बत में बर्बर कार्रवाई के लिए अपनी सेना भेज दी। 1959 में जब चीन की सेना ने तिब्बत में दमन चक्र चलाया तो 14वें दलाई लामा ने अपने कुछ विश्वस्तों के साथ 31 मार्च 1959 को भारत में शरण ले ली थी। तब से दलाई लामा भारत में रह रहे हैं। 

भारत ने उन्हें चीन के विरुद्ध किसी तरह की राजनीतिक गतिविधियों को चलाने की इजाजत नहीं दे रखी है। दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध समुदाय इसका पालन भी करता है, लेकिन भारत में दलाई लामा की मौजूदगी मात्र से ही चीन परेशान रहता है। दलाई लामा 17 मार्च को चुपचाप तिब्बत से निकले और पैदल रास्ते से 31 मार्च को तवांग (अरुणाचाल प्रदेश) के रास्ते से भारत में दाखिल हुए थे। तब से दलाई लामा यदि अमेरिका भी जाते हैं तो चीन चिढ़ता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें