चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग (फाइल फोटो)।
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भारत इस वर्ष जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। पहले दिन के सम्मलेन में दो सत्र आयोजित किए गए। दोनों सत्रों के बाद सम्मेलन में शामिल हुए राष्ट्र अध्यक्षों ने एक-दूसरे के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान चीन के प्रधानमंत्री ने भी इटली की प्रधानमंत्री के साथ बैठक की। बैठक के दौरान बीआरआई प्रोजेक्ट पर चर्चा की गई।
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में इटली के साथ रिश्तें मजबूत करने के लिए चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने इटली के बीआरआई प्रोजेक्ट से हटने पर चर्चा की। इटली का कहना है कि उसे इस परियोजना से कोई खास लाभ नहीं हुआ है।
इटली ने पहले ही जताई थी बीआरआई से बाहर निकलने की आशंका
बता दें, आशंका है कि इटली दिसंबर तक इस परियोजना से निकल सकता है। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने हाल ही में कहा था कि चार साल पहले बीआरआई में शामिल होना जल्दबाजी में किया गया नुकसानदेह फैसला था, हम जल्द बाहर आ सकते हैं। इसने निर्यात बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया। इटली ने वर्ष 2019 में पिछली सरकार के दौरान बीआरआई में शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया था। क्रोसेटो ने बताया था कि इटली को चीन से होने वाले निर्यात को कई गुना बढ़ा दिया, जबकि चीन को इटली से होने वाले निर्यात पर खास असर नहीं पड़ा। अब मुद्दा यह है कि चीन से रिश्ता खराब किए बगैर किस प्रकार बीआरआई से बाहर निकला जाए, क्योंकि यह सत्य है कि चीन प्रतिस्पर्धी है, लेकिन वह साझीदार भी है।
नए आर्थिक गलियारे में इतने देश शामिल
जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के खिलाफ भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। नए आर्थिक गलियारे में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरत, सऊदी अरब, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं। नए आर्थिक गलियारे के कारण एशिया, पश्चिम एशिया, मध्यपूर्व और यूरोप के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे। गलियारे में शामिल देशों के बीच बढ़ी हुई कनेक्टिविटी और आर्थिक एकीकरण से आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा और विकास को गति प्रदान होगा।