चीन अपने उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के जिनजियांग प्रांत में कथित आतंकवाद और अलगाववाद पर काबू पाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर का इस्तेमाल कर रहा है। जिनजियांग में पिछले दो दशक में इस्लामिक कट्टरवाद आतंकवाद और अलगाववाद का रूप ले चुका है जिसकी जड़ अफगानिस्तान और पाकिस्तान को माना जाता है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से आतंक की सप्लाई लाइन तोड़ने में मसूद चीन के लिए अहम रोल निभा रहा है। मामले से जुड़ी भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इसी वजह से चीन मसूद जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी को खुलेआम समर्थन देकर भारत जैसे अहम पड़ोसी से रंजिश का जोखिम उठा रहा है।
खुफिया एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि जिनजियांग के अलावा चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कुछ संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा के लिए भी मसूद के साथ चीन की सांठगांठ चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक सीपीईसी की सुरक्षा को लेकर चीन को पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है। भारत का मानना है कि चीन भी आतंकवाद से आतंकवाद की काट ढूंढने की कोशिश में है।
विदेश मंत्रालय में चीन मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन में आतंकवाद का चरम मोड़ 2014 में आया जब मुस्लिम बहुल जिनजियांग के एक युवक ने प्रसिद्ध तियानानमेन स्क्वायर पर आत्मघाती बमबारी कर दर्जनों चीनी नागरिकों को मार डाला था। उसके बाद अल कायदा ने जिनजियांग में कथित जेहाद का फरमान जारी किया।
पिछले कुछ सालों में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के प्रमुख अबु बकर अल-बगदादी ने भी चीन के खिलाफ कई बयान दिए। अपनी सरहद को लेकर अति संवेदनशील माने जाने वाले चीन ने जिनजियांग में काफी सख्ती कर दी।