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चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बयान पर बोले आर्मी चीफ रावत, हर सेना को युद्ध के लिए तैयार रहना पड़ता है

Sun, 05 Nov 2017 06:16 AM IST
एजेंसी / गोनिकोप्पल (कर्नाटक)
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सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने के बयान पर कहा है कि इसमें कुछ भी नया नहीं है।
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हर सेना को युद्ध के लिए तैयार रहना पड़ता है। शांति काल में सभी सेनाएं युद्ध का अभ्यास करती हैं। भारतीय सेना का प्रमुख होने के नाते मुझे भी इसके लिए तैयार रहना पड़ता है।

उन्होंने कहा दोकलम में चीन और भारत की सेनाएं तैनात हैं लेकिन उनके बीच तनाव की कोई स्थिति नहीं है।
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मालूम हो कि दोकलम विवाद के दौरान दोनों तरफ की सेनाएं करीब 72 दिन तक आमने सामने रही थीं। चीन के दोकलम में सड़क निर्माण कार्य को लेकर यह विवाद शुरू हुआ था। 
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आर्मी चीफ ने करिअप्पा के लिए की भारत रत्न की मांग

इससे पहले सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने स्वतंत्र भारत के पहले फील्ड मार्शल जनरल केएम करिअप्पा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर दूसरों को यह सम्मान मिल सकता है तो जनरल करिअप्पा को इससे सम्मानित नहीं करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।


कर्नाटक के कोडागु जिले के गोनिकोप्पल में जनरल करिअप्पा और जनरल केएस थिमैया की मूर्तियों का अनावरण करने के बाद जनरल रावत ने कहा कि फील्ड मार्शल करिअप्पा के लिए भारत रत्न की सिफारिश करने का सही समय आ गया है।

जनरल रावत का यह बयान कर्नल केसी सुबैया के अनुरोध के बाद आया है जिसमें उन्होंने जनरल करिअप्पा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग की थी। मालूम हो कि जनरल करिअप्पा और जनरल थिमैया दोनों की कोडागु जिले के रहने वाले थे।

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जनरल रावत ने कोडागु (पुराना नाम कूर्ग) को योद्धाओं की धरती बताते हुए कहा कि जनरल करिअप्पा और जनरल थिमैया की मूर्तियों का अनावरण करने का अवसर मिलने से वह खुद को खुशनसीब महसूस कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस धरती से भविष्य में सेना प्रमुख पैदा होंगे।

मालूम हो कि जनरल करिअप्पा को 28 अप्रैल, 1986 को फील्ड मार्शल का रैंक प्रदान किया गया था। दूसरे विश्व युद्ध में बर्मा में जापानियों को शिकस्त देने के लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर का प्रतिष्ठित तमगा दिया गया था। पाकिस्तान के खिलाफ 1947 की लड़ाई में भाग लेने वाले करिअप्पा 1953 में रिटायर हुए थे और 1993 में 94 साल की आयु में उनका निधन हुआ था।




 
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