दोकलम विवाद पर चीन अपनी दोहरी नीतियों से फिर भारत को नई मुसीबत देना चाहता है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन का कहना है कि चीन भारत और भूटान के बीच दोकलम मुद्दे पर नया विवाद पैदा करना चाहता है। मेनन का कहना है कि चीन इस विवाद के जरिए भारत और भूटान को आपस में बांटना चाहता है। इसीलिए चीन भूटान को यह मनवाना चाहता है कि सुरक्षा मामले में भारत उसका साथ नहीं देने वाला!
यूपीए सरकार में 2010-2014 तक भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे मेनन का मानना है कि भारत को अपनी भूटान सीमा पर तैनाती बढ़ाने के साथ-साथ खास तौर पर सचेत रहना चाहिए। बता दें कि भारत के भूटान के साथ बेहतर रिश्ते हैं और भारत की तरफ से भूटान को सैनिक सहायता भी दी जाती है, ऐसे में चीन की यह कोशिश जारी है कि वो भारत और भूटान को आपसी मतभेद में डालना चाहता है।
हाल में ही दोकलम में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी की खबरों के बीच सरकार में हरकत तेज हुई है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, विदेश सचिव विजय गोखले और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस महीने की शुरुआत में चुपचाप भूटान का असाधारण दौरा भी किया है। इस दौरान भूटानी नेतृत्व के साथ अहम रणनीतिक मुद्दों पर गहन बातचीत की गई थी।
सेना प्रमुख, एनएसए और विदेश सचिव ने दो सप्ताह पहले भूटान का गुपचुप दौरा किया था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इसका फोकस दोकलम पठार के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और रक्षा ढांचे के निर्माण पर नजर रखना है। तो चीन की फूट डालो वाली रणनीति पर भी अब भारत को सचेत रहना होगा।
भारती दौरे से तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भूटानी समकक्ष सेरिंग तोबगे के साथ गुवाहाटी में एक निवेश सम्मेलन से बातचीत भी की गई थी। सूत्रों ने बताया कि भूटानी पक्ष ने भूटान और चीन के बीच सीमा वार्ताओं की स्थिति के बारे में भारतीय पक्ष को अवगत कराया था और पहले ही इस बात पर जोर दिया कि थिंपू दोकलम ट्राई-जंक्शन में शांति चाहता है। ऐसे में भारत और भूटान दोनों देशों को चाहिए कि वह अपने आपसी संबंध चीन के बेतुके बयान से बचाए।