पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में दो बिलियन डॉलर की पनबिजली परियोजना को चीन की समय से पहले पूरा करने की योजना है।
पाक में बिजली के संकट को कम करने के लिए निर्माण कार्य तेज किया जाएगा। पीओके में झेलम नदी पर करोट पनबिजली परियोजना का निर्माण चल रहा है। 30 साल के लिए इसका स्वामित्व चीनी कंपनी के पास रहेगा। इसके बाद स्वामित्व पाक सरकार को हस्तांतरित हो जाएगा।
चीन के सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, करोट पॉवर कंपनी लिमिटेड चीन की थ्री गोरजेस साउथ एशिया इनवेस्टमेंट की सहायक कंपनी है।
इसी कंपनी के पास करोट विद्युत केंद्र का स्वामित्व है। कंपनी द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, इस परियोजना के पूरा होने के बाद चीन में बिजली की किल्लत दूर होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।
हालांकि समाचार पत्र ने किसी नई समयसीमा का जिक्र नहीं किया है। यह विद्युत केंद्र 720 मेगावाट क्षमता वाला होगा। इसके अलावा थ्री गोरजेस साउथ एशिया इनवेस्टमेंट के पास पाकिस्तान में कई अन्य ऊर्जा परियोजनाएं भी हैं, इनमें पनबिजली, पवन और सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट शामिल हैं।
चीन में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के ‘शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज’ में रिसर्च फेलो हू झियोंग के हवाले से अखबार लिखता है, ‘विवादित कश्मीर में होने के चलते भारत लंबे समय से इस प्रोजेक्ट के निर्माण को लेकर चिंता जाहिर करता रहा है, लेकिन इससे चीन और पाकिस्तान के बीच का सहयोग प्रभावित नहीं हुआ है, क्योंकि ये संबंध स्थिर हैं और इनके निशाने पर भारत नहीं है।’