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Chine Eying Twang: 1962 के बाद से ही तवांग पर चीन की बुरी नजर...मुंहतोड़ जवाब देने को भारत भी तैयार

Tue, 13 Dec 2022 06:22 AM IST
Amit Mandal एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की खराब नीयत एक बार फिर जगजाहिर हो गई है। इस इलाके में चीनी सैनिकों की हिमाकत की वजह से भारतीय सैनिकों से उनका टकराव हुआ है। कई मौकों पर दोनोों तरफ से संघर्ष की स्थिति पैदा हुई है। 
 
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भारत-चीन सीमा विवाद - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश के तवांग पर 1962 की जंग के बाद से चीन की बुरी नजर है। हालांकि उसका तवांग के यांगत्से पर कब्जे का सपना तब से अधूरा है। चीन सीमा पर मैकमोहन रेखा को लेकर यूं तो खामोश रहता था लेकिन 1962 के बाद से वह अरुणाचल को दक्षिणी तिब्बत बताने लगा। चीन ने पिछले कुछ सालों में तवांग के अलावा लद्दाख में एलएसी पर इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण को तेज रफ्तार दी है। हाईवे से लेकर मिलिट्री पोस्ट्स, हैलीपैड्स और मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स तक उसने तैयार कर ली हैं। ये सबकुछ तवांग के करीब ही हैं। इसी को ध्यान में रखकर मोदी सरकार ने भी पिछले आठ साल में पूर्वोत्तर में सीमा पर अवसंरचना निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी ताकि सैन्य आवाजाही आसान हो सके और चीन के किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब दिया जा सके। 
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दोनों देशों के साढ़े तीन हजार सैनिक करते हैं निगहबानी
यांगत्से तवांग से 35 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। यह जगह भारतीय सेना के लिए रणनीतिक अहमियत रखती है। दोनों देशों के तीन से साढ़े तीन हजार सैनिक इस क्षेत्र के आसपास हमेशा तैनात रहते हैं। यही नहीं ड्रोन से भी पूरे इलाके पर नजर रखी जाती है।

इसलिए चीन की गिद्ध दृष्टि
यांगत्से से चीन पूरे तिब्बत पर नजर रख सकता है। साथ ही उसे एलएसी की जासूसी करने का भी मौका मिल जाएगा।

एलएसी तक पहुंचने की राह की गई आसान
  • अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे (आंशिक रूप से पूर्ण)। यह देश की सबसे लंबी (2000 किलोमीटर) और कठिन राजमार्ग परियोजना है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर सुरंग(पूर्ण होने के करीब)।
  • सेला सुरंग पूर्ण होने की ओर है। यह 13 हजार फुट की ऊंचाई पर दो लेन की सुरंग है। बालीपारा-चारदुआर-तवांग रोड पर यह सुरंग पूरे साल रक्षा और निजी वाहनों को सीमा तक आवागमन सुनिश्चित करेगा। 13700 फुट की ऊंचाई पर सेला दर्रा अभी चीन की पहुंच में है।
  • 14,032 करोड़ रुपये की लागत से 35 परियोजनाओं पर काम जारी था अरुणाचल में इस वर्ष फरवरी तक
  • 2089 किलोमीटर सड़क बनाई है एलएसी के पास सीमा सड़क संगठन ने पिछले पांच साल में
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कब-कब बिगड़ी चीन की नीयत
  • अक्तूबर, 2021 में चीनी सैनिकों ने अरुणाचल में एलएसी के इस पार घुसने की कोशिश की थी। भारतीय जवानों ने चीन के 200 सैनिकों को पीछे धकेला।
  • 30 अगस्त, 2021 को चीन के 100 सैनिक उत्तराखंड के बारहोती में भारतीय सीमा में 4-5 किमी अंदर तक घुसे थे और करीब तीन घंटे तक रहे।
  • 29-30, अगस्त 2020 को पूर्वी लद्दाख में पेंगॉन्ग झील के चुशुल सेक्टर में भी चीनी सैनिकों ने हरकत की थी। भारत ने वापस लौटने पर मजबूर किया था।
  • 15 जून, 2020 को गलवां घाटी में संघर्ष हुआ था। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए और चीन के 43 सैनिक मार गिराए गए थे।
  • 21 मई, 2020 को भी गलवां घाटी में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी।
  • 10 मई, 2020 को सिक्किम के मुगुथांग व नाकू ला पर चीनी और भारतीय सैनिकों में झड़प हुई।
  • 5 मई, 2020 को लद्दाख के पैंगॉन्ग लेक पर चीनी सैनिकों और भारतीय जवानों में संघर्ष हुआ।

चीन ने 15 जगहों के नाम बदले भारत ने किया था विरोध
चीनी विदेश मंत्रालय ने 30 दिसंबर 2021 को भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की 15 जगहों के नाम बदलते हुए इसके ‘मानकीकृत’ नाम जारी किए थे।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने विरोध करते हुए कहा था कि ये पहली दफा नहीं है, पहले भी कोशिश की है। 
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