बफरजोन बनाने की नई चाल
गलवां नदी घाटी क्षेत्र में भारत और चीन दोनों की सेनाएं पीछे हटी थीं। चीन की सेना भारतीय भू-भाग से पीछे हटकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलसीए) पर चली गई थी। जबकि भारतीय फौज दो किमी से अधिक पीछे आई। इस बीच के क्षेत्र को दोनों देशों ने समाधान होने तक बफर जोन मानने पर सहमति जताई थी।
सूत्र बताते हैं कि यह पहल क्षेत्र-विशेष के लिए हुई थी। लेकिन चीन ने अब इसे सहमति का हथियार बनाना शुरू कर दिया। चीनी पक्ष चाहता है कि इसी तर्ज पर पैंगोंग, गोगरा पोस्ट, डेपसांग समेत अन्य स्थानों पर भी दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटें। हालांकि भारत ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
लेकिन सूत्र बताते हैं कि चीन का दबाव इसी तरह की व्यवस्था को लेकर बना हुआ है। दरअसल यह चीन की नई चाल है। वह इस बहाने भारतीय सेना को एलएसी से पीछे धकेल कर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को बदलना चाहता है। हालांकि विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दोनों चीन के इस प्रयास पर पहले ही उसे सावधान कर चुके हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही कुछ साफ होगी तस्वीर
पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने तक इसी तरह से चलता रहेगा। वहां चुनाव के बाद अमेरिका, चीन और ईरान के साथ किस तरह का दृष्टिकोण अपनाता है, उसका एशिया पर असर पड़ेगा। इसका असर भारत और चीन के रिश्ते पर भी पड़ेगा।
फिलहाल अभी भारत शांति, सौहार्द, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से चीन के साथ समस्या का समाधान चाहता है। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि बफर जोन और वह भी भारत की जमीन पर बनना, यह तो बहुत गलत बात होगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में हाल में रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सीडीएस के साथ बैठक की थी। सीडीएस जनरल विपिन रावत ने समाधान न होने पर सैन्य विकल्प की बात कही है। देखते हैं उनके इस तरह के बयान का कितना असर पड़ता है।
दोनों तरफ से दिए जा रहे हैं जैसे को तैसा के संकेत
चीन ने तिब्बत से लेकर शिनझियांग प्रांत तक पूरी सैन्य तैनाती कर रखी है। उसके अग्रिम फाइटर जेट, अवाक्स, ड्रोन, सर्विलांस, हेलीकाप्टर तथा सेटलाइट लगातार भारतीय क्षेत्र पर नजर रख रहे हैं। एलएसी के उस पार का क्षेत्र पठारी, कम ऊंचाई का है।
होतान, गांरगुंसा, काशगर, हॉपिंग, डिकोनका, डिजांग, लिंझी, पंगत में चीन की सेना पूरे युद्ध के लाव-लश्कर के साथ कैंप कर रही है। हेलीकाप्टर, टैंक, तोप का पूरा बेड़ा तैनात है। तिब्बत में सैन्य अभ्यास के बाद चीन ने पूरी सैन्य यूनिट को भारत से लगती सीमा के करीब मोबलाइज कर रखा है।
चीन के सामानांतर भारत ने अपने सैन्यबलों की ठोस तैनाती कर रखी है। सुखोई, मिराज, जगुआर, मिग सिरीज के विमान लद्दाख क्षेत्र में चीन की किसी भी गुस्ताखी का जवाब देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा अपाचे, एमआई-17 समेत हेलीकाप्टर का बेड़ा भी स्थिति पर निगाह रख रहा है।
भारत ने होवित्जर तोप, टैंक, आकाश प्रतिरक्षी मिसाइल, कंधे से फायर करके पांच किमी दूर तक के विमान, हेलीकाप्टर आदि को मार गिराने वाली इग्ला मिसाइल को तैनात कर रखा है। हालांकि रूस से ली गई इग्ला अपनी श्रेणी का बेसिक मिसाइल लॉन्चर है।
स्थानीय झड़प नहीं, युद्ध के बनेंगे आसार
इतने बड़े पैमाने पर अग्निम मोर्चो पर हथियारों की तैनाती को सामरिक हलके में बहुत गंभीरता से देखा जा रहा है। पूर्व विदेश सचिव शशांक भी इसे जटिल स्थिति मान रहे हैं। भारत का इलाका सीधी ऊंचाई वाला पहाड़ी है। जबकि चीन के क्षेत्र वाला हिस्सा पठारी। सैन्य सूत्र सीडीएस जनरल विपिन रावत के बयान को भी बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। उन्हें जनरल के बयान की टाइमिंग भी कम समझ में आ रही है।
सैन्य सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच में यदि सैन्य तनाव बढ़ा, तो इसके केवल सीमित युद्ध या स्थानीय झड़प तक रहने की संभावना कम है। क्योंकि इसमें यह पूरे एशिया क्षेत्र से लेकर विश्व स्तर पर धाक से जुड़ने वाला मसला बनेगा। इसलिए तोप के गोले, हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के बाद इसके पूर्ण युद्ध में बदलने की संभावना बढ़ सकती है।