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भारत और चीन पर दुनिया का बहुत कुछ निर्भर करता है : जयशंकर

Sat, 08 Aug 2020 11:29 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : ANI
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार को वर्चुअल इंडिया एट 75 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारत-चीन मुद्दे पर कहा कि आकार और प्रभाव को देखते हुए भारत और चीन पर दुनिया का काफी कुछ निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों का भविष्य ‘किसी तरह की समतुल्यता या समझ’ पर पहुंचने पर ही निर्भर करता है। 

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सीआईआई शिखर सम्मेलन में ऑनलाइन वार्ता के दौरान जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘समस्याएं’ हैं जो ‘अच्छी तरह परिभाषित’ हैं। वह एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या भारत और चीन अगले दस-बीस वर्षों में दोस्त बन सकते हैं, जैसे फ्रांस और जर्मनी ने अपने अतीत को छोड़कर नए संबंध स्थापित किए। जयशंकर ने सीधा जवाब नहीं दिया बल्कि संक्षिप्त रूप से संबंधों के ऐतिहासिक पहलु बताए।

उन्होंने कहा, ‘हम चीन के पड़ोसी हैं। चीन दुनिया में पहले से ही दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हम एक दिन तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे। आप तर्क कर सकते हैं कि कब बनेंगे। हम जनसांख्यिकीय रूप से काफी अनूठे देश हैं। हम केवल दो देश हैं जहां की आबादी एक अरब से अधिक है।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी समस्याएं भी लगभग उसी समय शुरू हुईं जब यूरोपीय समस्याएं शुरू हुई थीं।’ 
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विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोनों देशों के काफी मजबूत तरीके से उभरने के समय में भी बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम दोनों देशों के समानांतर लेकिन अलग-अलग उदय को देख रहे हैं। लेकिन ये सब हो रहा है जब हम पड़ोसी हैं। मेरे हिसाब से दोनों देशों के बीच किसी तरह की समानता या समझ तक पहुंचना बहुत जरूरी है।’

जयशंकर ने कहा, ‘यह न केवल मेरे हित में है बल्कि बराबर रूप से उनके हित में भी है और इसे कैसे करें यह हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है।’

भारत और चीन के बीच वर्तमान में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चल रहे गतिरोध के बीच जयशंकर ने कहा, ‘और मैं अपील करता हूं कि हमारे आकार और प्रभाव को देखते हुए दुनिया का काफी कुछ हम पर निर्भर करता है। इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है। समस्याएं हैं, समस्याएं तय हैं। लेकिन निश्चित रूप में मैं समझता हूं कि यह हमारी विदेश नीति के आकलन का केंद्र है।’

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