खुफिया सूत्रों के मुताबिक 15 अगस्त के बाद से अफगानिस्तान में हुए तख्तापलट के बाद चीन ने अपनी रणनीति बदल दी। सूत्रों के मुताबिक तालिबानियों के सत्ता पर काबिज होने के बाद इसी का सहारा लेकर चीन ने पाकिस्तान में अपनी और सुरक्षा एजेंसियों की कई टुकड़ियां को तैनात करना शुरू कर दिया। क्योंकि यह प्रोजेक्ट बलूचिस्तान से शुरू होकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, गिलगित बालटिस्तान होते हुए चीन के उत्तरी पश्चिम शिंजियांग तक जा रहा है। क्योंकि पाकिस्तान के जिन राज्यों से होकर इस कॉरिडोर को निकलना है उसमें अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुए तालिबानियों का बहुत दखल है।
सूत्रों का कहना है चीन ने इसी का आधार बनाते हुए सुरक्षा कर्मियों की संख्या को इस पूरे प्रोजेक्ट में बढ़ा दिया है। सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि यह प्रोजेक्ट अफगानिस्तान के एक इलाके से होते हुए चीन के उत्तर पश्चिमी राज्य शिंजियांग तक जा रहा है जहां पर पहले से ही तालिबानियों के मददगार उईगुर मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग रहते हैं। चीन का इस समुदाय से छत्तीस का आंकड़ा है और उसे इस बात का डर भी बना हुआ है कि कहीं इस पूरे इकोनामिक कॉरिडोर को तहस-नहस करने के लिए तालिबानी अपना पूरा जाल ना बिछा दें।
पाकिस्तान समेत एशिया के कई मुस्लिम देशों में खुफिया सेवाओं में काम कर चुके एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक का कहना है कि दरअसल चीन, पाकिस्तान की धरती को अपने निजी स्वार्थ और खुफिया मामलों के लिए इस्तेमाल करना चाह रहा है। पाकिस्तान की बिगड़ी हुई आर्थिक दशा और कमजोर सैन्य शक्तियों के चलते उसके पास इस वक्त चीन के सामने घुटने टेकने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं बचा है। क्योंकि पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट के माध्यम से चीन से कई तरीके के समझौते कर चुका है। जिसमें सैन्य समझौतों से लेकर आर्थिक समझौते भी शामिल हैं।
इस पूरे मामले को बहुत करीब से समझने वाले खुफिया विभाग के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि बलूचिस्तान के ग्वादर से शुरू होने वाले सीपीईसी प्रोजेक्ट की लंबाई तकरीबन ढाई हजार किलोमीटर की है। चीन ने पाकिस्तान को सौर ऊर्जा समेत दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के नाम पर अपने साथ जोड़ा है। क्योंकि पाकिस्तान के पास अपने आर्थिक संकट को दूर करने के लिए चीन के सामने घुटने टेकने के सिवा दूसरा कोई चारा नहीं बचता है। इसलिए उसने इस कॉरिडोर के नाम पर पाकिस्तान के ज्यादातर राज्यों को चीन की सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया है। चीन ने इस प्रोजेक्ट के नाम पर पाकिस्तान को नौ पनडुब्बी देने का न सिर्फ सौदा किया है बल्कि इस कॉरिडोर के माध्यम से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए अन्य देशों से भी पाकिस्तान के संबंध बेहतर करने का वादा भी किया है।
अब चीन और पाकिस्तान को तालिबानियों से डर लग रहा है। जानकारों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर जिन राज्यों से इस इकोनामिक कॉरिडोर को निकाल रहे हैं उनमें ज्यादातर राज्यों के लोग पाकिस्तान और चीन से नफरत करते हैं। लगातार इन राज्यों के लोगों की मांग को लेकर तालिबानी कमांडर न सिर्फ पाकिस्तान को निशाने पर लेते रहे हैं बल्कि अफगानिस्तान में सत्ता बदलने के बाद इन राज्यों के आतंकी संगठनों के साथ खुलकर सामने भी आने लगे हैं। ऐसे में लगभग 50 बिलियन डॉलर के इस प्रोजेक्ट पर संकट तो खड़ा हो गया है, लेकिन इस संकट में भी चीन ने अपनी नई चाल चली शुरू कर दी है। यह चाल पाकिस्तान में अपनी सुरक्षा एजेंसियों के ज्यादा से ज्यादा लोगों की संख्या में तैनाती की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कीमत पर चीन इस प्रोजेक्ट को पूरा करना चाह रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए वह तालिबानियों से हाथ भी मिलाने को तैयार है। दरअसल चीन के लिए सीपीईसी प्रोजेक्ट आर्थिक दृष्टिकोण से बहुत फायदेमंद सौदा है। इसके अलावा सैन्य दृष्टिकोण से भी चीन को यह कॉरिडोर बहुत फायदेमंद लग रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी चीन को हिंद महासागर होते हुए अपने देश पहुंचने के लिए 12 हजार किलोमीटर लंबे रास्ते का चयन करना पड़ता है। जबकि इस कॉरिडोर के बन जाने से उसकी हिंद महासागर से सीधे नौ हजार किलोमीटर की न सिर्फ दूरी कम हो जाएगी, बल्कि हिंद महासागर तक उसकी पहुंच भी बहुत आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है अगर चीन की पहुंच हिन्द महासागर तक सीधे हो गई तो वह कई देशों के लिए चुनौती के तौर पर सामने खड़ा हो जाएगा। इसलिए चीन इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए हर कीमत अदा करने को तैयार है। तालिबानियों के सत्ता पर काबिज होने के बाद जिस तरीके से उनका संवाद बलूचिस्तान के तमाम आतंकी संगठनों से होना शुरू हुआ उससे चीन की चिंता तो बढ़ गयी है। इसीलिए उसने इस बहाने से अपनी सुरक्षा एजेंसियों को पाकिस्तान में ज्यादा से ज्यादा तैनात करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है चीन का पाकिस्तान की जमीन पर इतने ज्यादा दखल से पड़ोसी मुल्कों को बहुत ज्यादा सजग रहना होगा।