सीमांत ट्राई-जंक्शन 'काला पानी, लिपुलेख और तवाघाट' जो भारत, चीन और नेपाल बॉर्डर से सटा हुआ है, वहां पर एसएसबी के आईजी को दोहरी जिम्मेदारी सीमा चौकसी के लिए भारी पड़ सकती है।
पिथौरागढ़ जिला उत्तराखंड का महत्वपूर्ण संवेदनशील बार्डर है। हाल ही में नेपाल ने अपने मानचित्र के हिस्से में यहां के क्षेत्र को दर्शाया है। इस बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी को सौंपी गई है।
उत्तराखंड के लिपुलेख से मानसरोवर की यात्रा सिर्फ 90 किमी है। नेपाल और सिक्किम के रास्ते मानसरोवर आने-जाने में 20 दिन से ज्यादा वक्त लगता है। लिपुलेख में सड़क बनने से यह यात्रा केवल तीन दिन में पूरी हो सकती है।
सिक्किम और नेपाल की तुलना में उत्तराखंड वाला यह रास्ता सबसे छोटा माना जाता है। उत्तराखंड वाले रास्ते के भी तीन हिस्से हैं। एक, पिथौरागढ़ से तवाघाट, दूसरा तवाघाट से घटियाबगढ़ और तीसरा, घटियाबढ़ से लिपुलेख दर्रा।
पिथौरागढ़ से तवाघाट तक तो सड़क है, मगर तवाघाट से घटियाबगढ़ के बीच केवल एक मार्गी रास्ता है। बीआरओ यहां पर सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। घटियाबगढ़ से लिपुलेख दर्रे के अधिकांश हिस्से पर पक्की सड़क का निर्माण हुआ है।
महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, उत्तराखंड के धारचूला से काला पानी नदी के साथ फैले हुए इलाके पर ड्रैगन की नजर है। भारत-नेपाल बॉर्डर पर एसएसबी तैनात है। इस इलाके की चौकसी बेहतर तरीके से हो, इसके लिए रानीखेत में बल हेडक्वार्टर बनाया गया था।
इस हेडक्वार्टर की कमान आईजी को दी गई थी। अब लंबे समय से यहां पर आईजी नहीं बैठ रहे हैं। वजह, जिस आईजी स्तर के आईपीएस अधिकारी के पास रानीखेत सीमांत मुख्यालय का कार्यभार है, वे खुद दिल्ली स्थित एसएसबी मुख्यालय में बैठते हैं।
आईजी के पास एडमिनिस्ट्रेशन का चार्ज होता है और उन्हें अतिरिक्त चार्ज के रूप में रानीखेत सीमांत मुख्यालय की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। बतौर रणबीर सिंह, आईजी एसएस चतुर्वेदी को स्थाई तौर पर रानीखेत सीमांत मुख्यालय में होना चाहिए, लेकिन वे यहां कभी कभार ही आते हैं।
नियम यह कहता है कि आईजी नियमित तौर पर रानीखेत मुख्यालय में बैठें। एसोसिएशन के कुमाऊं मंडल के अध्यक्ष एमएस नेगी व उपाध्यक्ष तारादत्त शर्मा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से अनुरोध किया है कि सीमा पर बेहतर तालमेल, सुरक्षा संबंधी जरूरतों व अतिसंवेदनशील बार्डर की चाक-चौबंद चौकसी के लिए स्थाई तौर पर कैडर आफिसर्स को सीमांत मुख्यालय रानीखेत का कार्यभार दिया जाए।
ऐसे अफसर को यहां की कमान सौंपी जाए, जिसने जवानों के साथ सरहदी बंकरों में रातें गुजारीं हों। साथ ही वह अधिकारी यहां के बार्डर इलाकों की भौगोलिक स्थिति से भलीभांति परिचित हो।