संयुक्त राष्ट्र संघ में 15 में से 14 देश मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में थे
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पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रस्ताव का चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विरोध किया है। भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि यह समझ से परे है कि जैश-ए-मोहम्मद को आतंकी गतिविधियों और अल कायदा से संबंधों के कारण 2001 में प्रतिबंधित कर दिया गया था लेकिन उसके नेता पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी गई है। स्वरूप ने वॉशिंगटन में परमाणु सुरक्षा सम्मेलन के इतर संवाददाताओं से कहा कि हम इस बात से निराश हैं कि मसूद पर प्रतिबंध लगाने के हमारे आवेदन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति तकनीकी रोक लगा दी है।
आपको बताते चले कि संयुक्त राष्ट्र संघ में आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर चीन ने भारत को पीछे की तरफ ढकेल दिया है। पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले का मुद्दा भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाते हुए जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रश्न उठाया था। भारत ने मांग की थी कि अल-कायदा सेक्शन कमेटी के तहत मौलाना मसूद अजहर पर कार्रवाई हो।
बताया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में 15 में से 14 देश मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में थे। पर अकेले चीन सभी देशों के खिलाफ चल गया और आतंकी संगठन के पक्ष में फैसला लिया।
चीन ने अपने फैसले को लेकर कोई जवाब नहीं दिया है। अपने लिखित जवाब में चीन ने कहा कि वो भारत के प्रस्ताव को अभी रोक रहे हैं। भारत के फैसले का अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने समर्थन किया है। साथ ही कई अन्य देश भी मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है।
आपको बताते चले कि संयुक्त राष्ट्र संघ के पांच स्थायी सदस्यों में चीन भी है। चीन ने अपने वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए, भारत के इस प्रस्ताव को रोक दिया।
पाकिस्तान के अलावा चीन ही ऐसा देश है जो अब मौलान मसूद अजहर के साथ खड़ा दिखाई देता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के स्थायी प्रतिनिधित्व करने वाले सैय्यद अकबरद्दीन ने कहा कि 'जहां तक जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हमले की बात है कि हम न्याय के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं। यह ऐसा मुद्दा नहीं है कि हम उसे भूल जाएं या फिर छोड़ दें।