आज बच्चे न घर में सुरक्षित हैं, न स्कूल में और न ही बाहर। बाल यौन शोषण हो या उत्पीड़न भारत में महामारी की तरह फैल चुका है। आंकड़ों पर नजर डालें तो हर 4 में से एक लड़की और 6 में से 1 लड़का 18 वर्ष का होने से पहले यौन हिंसा का शिकार होता है। शोध बताते हैं कि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले 90 फीसदी लोग परिवार के होते हैं या फिर जानकार होते हैं।
वहीं भारत में हर दिन 40 बच्चों के साथ बलात्कार की घटनाएं होती है जबकि 48 बच्चे दुराचार का शिकार होते हैं। इसी कड़ी में 10 बच्चे ट्रैफिकिंग के शिकार होते हैं, यानी इन बच्चों को
वैश्यावृत्ति और बाल मजदूरी के लिए खरीदा और बेचा जाता है। जबकि हर छह मिनट में देश के किसी कोने से एक बच्चा गायब हो जाता है।
बच्चे न हों हिंसा का शिकार इसके लिए हम कैसे बने भागीदार
बच्चों को हिंसा का शिकार होने से बचाने के लिए बहुत जरूरी है कि उन्हें अनजान के साथ अकेले न छोड़ें और यह भी ध्यान रखें कि क्या किसी पड़ोसी या रिश्तेदार के घर आने पर बच्चा घबराता तो नहीं है। अगर ऐसा है तो अपने बच्चे के सपोर्ट में खड़े रहें। बच्चों के साथ घर, पार्क, स्कूल में सतर्क रहें, ज्यादातर हैवान इन्हीं जगहों पर बच्चों पर नजर रखते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं।