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स्कूलों में महफूज नहीं है बचपन

Sat, 09 Sep 2017 12:44 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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क्या स्कूल बच्चों के लिए कब्रगाह बन रहे हैं। महज एक महीने में राजधानी एनसीआर के स्कूलों में एक के बाद एक बच्चों की हुई हत्या के बाद अब अभिभावक अपने बच्चो को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। शुक्रवार को साइबर सिटी गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल में दूसरी कक्षा के छात्र की गला काटकर हत्या कर दी गई।
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सात साल के प्रद्युम्न का शव स्कूल पहुंचने के महज 15 मिनट बाद ही स्कूल के टॉयलेट में मिला। जबकि पिछले महीने अगस्त में गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जीडी गोयनका स्कूल में अरमान सहगल की मौत से पूरा एनसीआर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहम गया था।

पढ़ें: गुरुग्राम: 7 साल के मासूम से बस कंडक्टर ने की कुकर्म की कोशिश , गिरफ्तार

2016 में भी वसंत कुंज स्थित रायन स्कूल इंटरनेशल के एक छात्र देवांश की मौत ने भी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाया था। देवांश के साथ स्कूल में कुकर्म (अप्राकृतिक कृत्य) की भी आशंका जताई गई थी देवांश के ऐनल प्वाइंट पर रूई लगी थी जबकि देवांश का शव पानी टंकी के पास मिला था। बड़ा सवाल ये था कि देवांश पानी टंकी के पास कैसे पहुंचा और उसके शव को टंकी से कैसे निकाला गया। 
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बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की भी जरूरत होती है। लेकिन अगर पिछले कुछ दिनों में बच्चों के साथ घट रही घटनाओं पर नजर डालें तो ज्यादातर स्कूल और सरकारों ने इसपर कुछ खास ध्यान नहीं दिया है। पिछले कुछ महीनों या सालों में बच्चों की सुरक्षा के इंतजामों की कमी के चलते कई नौनिहालों को जान से हाथ तक धोना पड़ा है। बच्चों के साथ बढ़ रहे मामलों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने स्कूलों से जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने की गाइड लाइन तक जारी किया है। लेकिन फिरभी देश के ज्यादातर स्कूलों में सुरक्षा का इंतजाम संतोषजनक नहीं है।
 
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महिला एवं विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हर 3 में से 2 बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं

वैसे सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम और कानून तो कई बनाएं हैं लेकिन सब फाइलों में ही दफन हैं। चाहें वो स्कूल में खेलकूद को लेकर नियम हो या फिर हर स्कूल में सुरक्षित स्थानों का होना। या फिर बात करें स्कूलों में बिजली से सुरक्षा व्यवस्था की। हर मामलें में निजी स्कूलों से लेकर सरकारी स्कूल तक अनदेखी का नजारा देखने को मिल रहा है। 

एक बाद एक बच्चों से स्कूलों में हो रहे कुकर्मों और शारीरिक शोषण के बाद स्कूल प्रशासन से अभिभावक डरे हुए हैं। महिला एवं विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हर 3 में से 2 बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। जबकि 70 फीसदी मामले सामने भी नहीं आ पाते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग देश के संरक्षित और सुरक्षित स्कूलों पर एक सर्वेक्षण करा रहा है।इस सर्वे में देशभर के करीब 80 हजार स्कूलों के करीब 8 लाख छात्रों से बातचीत की जाएगी। 
 
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