दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने रविवार को समयपुर बादली इलाके से छापेमारी कर 11 बाल मजदूरों को मुक्त कराया। इन बच्चों से खतरनाक फैक्ट्रियों में बारह-बारह घंटे तक काम लिया जा रहा था। काम के बदले में उन्हें मात्र 100 से 150 रुपये तक मजदूरी दी जाती थी।
एक की उम्र मात्र आठ साल थी
इन बच्चों में सबसे छोटे बच्चे की उम्र महज आठ साल थी। आयोग ने इन बच्चों को मुक्त कराकर चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में सुरक्षित जगह रख दिया है जहां बच्चों की पूरी देखरेख की जा रही है। इन बच्चों को बेहद तंग हालात में रखा जा रहा था जिससे इनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा था।
सात जगह पर की छापेमारी
सूत्रों से जानकारी मिलने के बाद दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने समयपुर बादली की सात जगहों पर छापेमारी कर इन 11 बच्चों को मुक्त कराया। एसडीएम अलीपुर अजीत सिंह ठाकुर ने इस टीम का नेतृत्व किया और इलाके की सभी प्रमुख जगहों पर छापेमारी की। टीम में बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले कुछ संगठनों को भी रखा गया।
2023 तक बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य
दिल्ली को 2023 तक बालश्रम से पूरी तरह मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसी अभियान के मद्देनजर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके पहले भी 28 जनवरी को पश्चिमी दिल्ली से एक कार्रवाई कर 51 बच्चों को सकुशल बरामद किया गया था। इनमें 10 लड़के और 41 लड़कियां शामिल थीं।