अप्रैल से दिसंबर 2023 के बीच राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को बच्चों से जुड़े अपराधों की करीब एक लाख शिकायतें मिलीं। इनमें सबसे अधिक 39,500 शिकायतें उपेक्षित, दिव्यांग और हाशिए पर पड़े बच्चों की देखभाल से जुड़ी थीं। बाल श्रम और संकटग्रस्त बच्चों से जुड़े लगभग 20 हजार मामलों में से 19,645 अब भी लंबित हैं।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के बीच बाल अपराधों से जुड़ीं लगभग एक लाख शिकायतें मिलीं। इसमें सर्वाधिक 39,500 मामले किशोर न्याय और उपेक्षित, हाशिए पर पड़े या दिव्यांग बच्चों की देखभाल से संबंधित थीं। वहीं, बाल श्रम और संकटग्रस्त बच्चों से संबंधित शिकायतों की कुल संख्या लगभग 20 हजार थी। इसमें से 2024 के अंत तक 19,645 मामले लंबित थे।
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महिला और बाल विकास मंत्रालय की वार्षिक रिपार्ट के मुताबिक, एनसीपीसीआर ने अपर्याप्त पुनर्वास सेवाएं, बाल देखभाल संस्थानों की खराब स्थिति और दिव्यांग बच्चों के लिए सीमित सहायता जैसे मुद्दे सबसे अधिक रिपोर्ट किए। शिकायतों की सबसे बड़ी श्रेणी किशोर न्याय और उपेक्षित, दिव्यांग बच्चों की देखभाल से संबंधित थी। इसमें 39,500 से अधिक केस दर्ज किए गए। इनमें से 18,954 का 2024 के अंत तक समाधान कर दिया गया।
शिक्षा से जुड़ीं 8,200 शिकायतें मिली
रिपोर्ट के मुताबिक, बाल स्वास्थ्य, देखभाल और विकास की श्रेणी में 18,500 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। शिक्षा संबंधी शिकायतों के 8,200 से अधिक मामले थे। वहीं पॉक्सो अधिनियम के तहत 6,800 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें यौन शोषण, शोषण और बाल संरक्षण कानूनों के उल्लंघन के मामले शामिल थे। इसके अलावा, बाल तस्करी की 46 शिकायतें मिलीं।