केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जिस नाबालिग लड़की और उसके पिता पर एक महिला पुलिस अधिकारी ने चोरी का आरोप लगाया था, उसे राज्य द्वारा मुआवजा दिया जाना चाहिए। अदालत ने एलडीएफ सरकार से पूछा कि वह कितनी राशि की पेशकश करने को तैयार है। हालांकि, अदालत ने कहा कि वह लड़कियों के परिवार द्वारा मांगी गई 50 लाख रुपये की मांग को स्वीकार नहीं करने जा रही है क्योंकि यह बहुत बड़ी राशी है। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने कहा कि उन्हें निश्चित रूप से सार्वजनिक कानून के तहत मुआवजा दिया जाना है। मेरा मानना है कि मुझे इस मामले में सरकार से विशेष प्रतिक्रिया चाहिए, जिसमें यह भी शामिल हो कि वे किस आंकड़े को स्वीकार करने के इच्छुक हैं।
हाई कोर्ट ने पूछा, लड़की को कैसे मनाएगी सरकार
न्यायाधीश ने कहा कि 6 दिसंबर को सुनवाई की आखिरी तारीख को उन्होंने राज्य सरकार से पूछा था कि वह नाबालिग लड़की की भावनाओं को कैसे शांत करने जा रही है। लेकिन ऐसा लगता है कि आप (सरकार) समझ नहीं पाए कि मेरा क्या मतलब है। यह टिप्पणी राज्य द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई है कि वह बच्चे का मानसिक परीक्षण करेगी और इसके अलावा कुछ नहीं कहा गया। अदालत ने मामले को 20 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत 8 वर्षीय लड़की द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकार को उसके मौलिक अधिकार के उल्लंघन के लिए अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने 27 अगस्त को हुई अपमानजनक घटना के लिए सरकार से मुआवजे के रूप में 50 लाख रुपये की भी मांग की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारी के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक जांच होनी चाहिए। पुलिस द्वारा महिला अधिकारी के आचरण का समर्थन लोगों की नजरों में उनके लिए स्थिति को बदतर बना रहा है।