असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
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असम सरकार द्वारा राज्य में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के अस्तित्व को लेकर किए गए दावों पर उठे विवाद के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि यह पौराणिक स्थल असम के प्राचीन कामरूप में स्थित है। गुवाहाटी के पमोही में भीमाशंकर धाम ज्योतिर्लिंग मंदिर की यात्रा के दौरान, सरमा ने कहा कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का आगमन शिव पुराण के अनुसार कामरूप प्रदेश में हुआ था।
पुराण में डाकिनी पर्वत और कामरूप के राजा का वर्णन है। शिवपुराण में स्पष्ट लिखा है कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कामरूप में है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, यह हमारी मान्यता है..महाराष्ट्र की अपनी मान्यताएं हो सकती हैं। भारत में अन्य स्थानों पर भी भगवान शिव को लेकर अपनी मान्यताएं हैं। दावों के साथ असम सरकार के एक विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए महाराष्ट्र के नेताओं ने हाल ही में एक विवाद खड़ा कर दिया था। परंपरागत रूप से, पुणे के पास भीमाशंकर में शिव मंदिर को देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से छठा माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव जिन स्थानों से प्रकट हुए, उन्हें ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है।
यहां से गरमाया विवाद
द्वादश ज्योतिर्लिंग में छठे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को लेकर असम लंबे समय से दावा करता रहा है कि असली भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग उसके यहां है। वहीं, महाराष्ट्र लगातार इसका विरोध करता रहा है। इस समय ये मुद्दा तब गरमाया जब असम सरकार ने मंगलवार को देश के अखबारों में विज्ञापन जारी कर भीमाशंकर मंदिर असम में डाकिनी पहाड़ी पर होने का दावा करते हुए महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। असम सरकार की ओर से दिए गए विज्ञापन में भीमाशंकर की कथा भी बताई गई है। विज्ञापन में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम दिया गया है, लेकिन पुणे स्थित भीमाशंकर मंदिर की जगह असम के भीमाशंकर को छठा ज्योतिर्लिंग बताया गया है।