भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने RGNUL की दीक्षांत समारोह में युवा वकीलों को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सिर्फ कागज का नहीं, बल्कि जीवन देने वाला खाका है। उन्होंने जोर दिया कि वकील केवल मामलों को जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि देश का निर्माण करें और सोचें कि आज के फैसले कल के समाज को कैसे प्रभावित करेंगे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मंगलवार को युवा वकीलों को अनोखा संदेश दिया। एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने युवा वकीलों से कहा कि उन्हें खुद को केवल 'केस बिल्डर' नहीं बल्कि 'नेशन बिल्डर' समझना चाहिए। उन्होंने छात्रों से पूछा कि एक वकील का भारत जैसे देश में क्या महत्व है और उसकी भूमिका क्या होनी चाहिए। बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत यह बात राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RGNUL) की सातवीं दीक्षांत समारोह में कह रहे थे।
सीजेआई ने छात्रों को दिए ये संदेश
सीजेआई ने आगे कहा कि न्यायिक सुधार और अदालतों के आधुनिकीकरण का असली मतलब तभी होगा जब युवा वकील इसे जमीनी स्तर पर लागू करेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि केस बिल्डर पूछता है, मैं कैसे जीतूं? वहीं नेशन बिल्डर पूछता है, मैं किस सिस्टम को मजबूत कर रहा हूं?
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कानून में लंबे करियर के लिए तीन आधार जरूरी- सीजेआई
उन्होंने कहा कि एक सफल और लंबे करियर के लिए तीन आधार जरूरी हैं, ईमानदारी, सहानुभूति और जिज्ञासा। ईमानदारी न्याय प्रणाली का आधार है, सहानुभूति से न्याय सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में सही मायने में लागू होता है और जिज्ञासा कानून को बदलती दुनिया के अनुसार प्रतिक्रियाशील बनाती है। अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने तकनीक का उपयोग करने की सलाह भी दी, लेकिन चेताया कि तकनीक न्याय का विकल्प नहीं बल्कि मददगार हो।
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