सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले से मुस्लिम पक्षकारों ने कहा है कि यह फैसला भावी पीढ़ियों पर असर डालेगा। यह राज्य व्यवस्था को नया रूप देगा। उत्तरप्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड सहित मुस्लिम पक्षकारों ने सोमवार को मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर लिखित दलीलें कोर्ट में दायर कीं।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मुस्लिम पक्ष को लिखित नोट दाखिल करने की इजाजत दी थी। मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने मांग की थी कि उन्हें राहत में बदलाव के बारे में लिखित नोट रिकॉर्ड पर लाने की इजाजत दी जाए। हालांकि लिखित नोट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने पर विभिन्न पक्षकारों और कोर्ट की रजिस्ट्री ने आपत्ति जताई है।
वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने मुस्लिम पक्ष की ओर से यह नोट तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि अदालत का फैसला चाहे जो हो, यह भावी पीढ़ियों और राज्य व्यवस्था पर असर डालेगा।
यह देश के करोड़ों नागरिकों और 26 जनवरी, 1950 को लोकतंत्रिक राष्ट्र घोषित किए जाने के बाद सांविधानिक मूल्यों को अपनाने और उसमें विश्वास रखने वालों के दिमाग पर असर डाल सकता है।
नोट में कहा गया है कि इस फैसले का दूरगामी असर होगा। ऐसे में कोर्ट इसके परिणामों पर विचार करते हुए राहत में ऐसा बदलाव करे, जिसमें संवैधानिक मूल्यों की झलक दिखे।