मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शुक्रवार को बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग से इंकार कर दिया। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर की तरफ लौटने की मांग की है।
पिछले महीने यहां विपक्षी दलों की ब्रिगेड रैली में, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने ईवीएम को चोर मशीन कहा था। अरोड़ा ने बताया, छेड़छाड़ और खराबी के बीच अंतर है।
इस पर अड़ोरा ने कहा हम बहुत ही हल्के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे कि वे समानार्थी हों। छेड़छाड़ और खराबी दो अलग-अलग चीजें हैं। आयोग खराबी को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता है। हम लगातार ईवीएम को अपडेट करने और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका स्थित एक स्वयंभू हैकर के हाल के दावे के बारे में पूछे जाने पर कि 2014 के चुनाव में ईवीएम में छेड़छाड़ कर धांधली की गयी थी, अरोड़ा ने कहा कि ये दावे झूठे और आपराधिक मंशा से किये गए हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि ईवीएम का निर्माण बेहद सुरक्षित कंपनियां करती हैं । ये कंपनियां रक्षा उपकरण भी बनाती हैं और तकनीकी विशेषज्ञों का पैनल इनकी देखरेख करता है।
अरोड़ा ने कहा कि हाल ही में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में वीवीपैट का इस्तेमाल सफल रहा है और आगामी लोकसभा चुनावों में इसका इस्तेमाल पूरे देश में किया जाएगा।