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देशद्रोह कानून रद्द नहीं होगा: रिजिजू के एलान पर चिदंबरम ने किया तंज, केंद्रीय मंत्री ने किया पलटवार

Sat, 11 Dec 2021 02:29 PM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देशद्रोह कानून को रद्द नहीं करने के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कानून मंत्री किरण रिजिजू के बयान पर कटाक्ष किया। चिदंबरम ने कहा कि इस सरकार में कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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पी चिदंबरम - फोटो : social media
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विस्तार
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देशद्रोह कानून को रद्द नहीं करने के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू के बयान पर कटाक्ष किया। चिदंबरम ने कहा कि इस सरकार में कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसमें निर्दोष लोगों को फंसाकर सजा दी जा रही है। इसके बाद रिजिजू ने पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हजारों लोगों पर देशद्रोह के केस लगाए हैं। 

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शुक्रवार को असम के एक सांसद के सवाल पर कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि राजद्रोह कानून खत्म करने का गृह मंत्रालय का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।  लोकसभा में रिजिजू के लिखित जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए, चिदंबरम ने ट्वीट किया, "कानून मंत्री ने कहा कि एमएचए ने उन्हें सूचित किया है कि राजद्रोह कानून (धारा 124 ए) को निरस्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह नहीं कहा कि एमएचए के पास बुक करने के प्रस्ताव हैं या नहीं।' 

कांग्रेस नेता ने कहा कि कानून मंत्री ने यह भी कहा कि देशद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी का उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। चिदंबरम ने एक अन्य ट्वीट में कानून मंत्री रिजिजू पर तंज कसते हुए लिखा, " उन्होंने यह नहीं कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्टिंग करने वाले समाचार पत्र नहीं पढ़ते हैं।"
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रिजिजू ने यह किया पलटवार
चिदंबरम के तंजभर ट्वीट पर रिजिजू ने ट्वीट कर पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने  कहा, 'चिदंबरम बताएं कि पूववर्ती कांग्रेस सरकार ने लोगों पर कितने हजार देशद्रोह के मामले दायर किए थे? कानून मंत्री अखबार नहीं पढ़ते, लेकिन वह जानते हैं कि मीडिया रिपोर्ट सरकारी विभागों के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनतीं। सम्मानीय सुप्रीम कोर्ट ने जानती है कि टिप्पणियां किस तरह की जाती हैं और औपचारिक आदेश किस तरह पारित किए जाते हैं।'

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