पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदबरम का मानना है कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में एक से डेढ़ साल लगेंगे। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को समझने के लिए जो मानक हैं उसके आंकड़ों से स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है। ग्रास वैल्यू एडिशन यानि जीवीए और अन्य मानकों का ट्रेंड देखकर लगता कि अर्थव्यवस्था ठीक कैसे हो सकती है। उन्होंने पिछले तीन सालों के प्रत्येक तिमाही के जीवीए के आंकड़े पेश किए जिसमें लगातार गिरावट दर्ज हुई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस के कानून एवं मानवाधिकार विभाग की ओर से कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सेमिनार में चिदंबरम ने ये बात कही। इस मौके पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह आहलूवालिया, सांसद कपिल सिब्बल ने भी अपने विचार रखे। सेमिनार में नोटबंदी पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी संदेश भी पढ़ा गया।
चिदंबरम ने कहा नोटबंदी का असर सरकारी उपक्रमों पर नहीं पड़ा है। बिजली, पानी उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को पुराने नोट में उसका पुराना बकाया मिल गया। लिहाजा इसका असर जीडीपी में नहीं दिख रहा है। मानसून अच्छा रहने से कृषि उत्पादन पर फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार को अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन के सवाल का उत्तर देना चाहिए। सरकार ने नोटबंदी पर जो तर्क दिया था उसका एक भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। हाईक्वालिटी नोट की नकली करेंसी लगातार पकड़ी जा रही है।