छगन भुजबल ने कहा कि पार्टी में संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है और हर कोई राज्य इकाई का प्रमुख बनने की इच्छा व्यक्त कर सकता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। महाराष्ट्र की आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 54 फीसदी है और अगर राज्य प्रमुख ओबीसी हो तो पार्टी इस वर्ग को करीब ला सकती है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता छगन भुजबल ने गुरुवार को महाराष्ट्र में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के लिए ओबीसी नेता की वकालत की। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही एनसीपी नेता अजित पवार ने एनसीपी नेतृत्व से उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त करने और पार्टी संगठन में कोई भूमिका सौंपने की अपील की थी। वह मुंबई में आयोजित एनसीपी के 24वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में यह बात रखी। जिसमें एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
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अजित पवार ने पिछले साल जुलाई में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में उपमुख्यमंत्री थे। लेकिन महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शिवसेना में विद्रोह के कारण उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई थी।
अन्य पिछड़ा वर्ग से किसी को महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष बनाने की वकालत करते हुए भुजबल ने गुरुवार को कहा कि वह प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर भी काम करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में सुनील तटकरे, जितेंद्र आव्हाड, धनंजय मुंडे जैसे कई ओबीसी नेता हैं, जो पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
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उन्होंने आगे कहा कि पार्टी में संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है और हर कोई राज्य इकाई का प्रमुख बनने की इच्छा व्यक्त कर सकता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। महाराष्ट्र की आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 54 फीसदी है और अगर राज्य प्रमुख ओबीसी हो तो पार्टी इस वर्ग को करीब ला सकती है।
आपको बता दें कि भुजबल 1999 में एनसीपी के गठन के बाद महाराष्ट्र में पहले पार्टी प्रदेश अध्यक्ष थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल पांच साल से इस पद पर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख नाना पटोले ओबीसी हैं। भुजबल ने कहा कि यह पार्टी के लिए बेहतर होगा कि अगर एनसीपी की राज्य इकाई का अध्यक्ष ओबीसी समुदाय से हो। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए नेता प्रतिपक्ष एक छोटे समुदाय से होना चाहिए।