सीआरपीएफ ने सुकमा में नक्सली हमले की शिकार हुई उस टीम के कमांडर को निलंबित कर दिया है जिसके 25 जवानों की मौत बीते 24 अप्रैल को हो गई थी। यह कार्रवाई घटना की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद की गई है।
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारिक सूत्र ने बताया कि कंपनी कमांडर, सहायक कमांडेंट जे विश्वनाथ को ‘नेतृत्व की विफलता’ के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जबकि 74वीं बटालियन के कमांडिंग अधिकारी, कमांडर फिरोज कुजुर को छत्तीसगढ़ से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है। सुकमा नक्सली हमले के शिकार हुए जवान इसी बटालियन की डेल्टा कंपनी से थे जिन्हें बुरकापाल और चिंतागुफा के बीच तैनात किया गया था।
माना जा रहा है कि सुकमा में नक्सलियों के हमले में अपने 37 जवानों को खाने के बाद सीआरपीएफ ने अपनी घरेलू व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यह कार्रवाई की है। सीआरपीएफ ने करीब आधा दर्जन कमांडेंट्स सहित एक डीआईजी का भी तबादला कर दिया है। इन अधिकारियों की जगह देश के अलग-अलग हिस्सों से कुछ चुनिंदा और सर्वश्रेष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। हालांकि कुछ तबादलों को रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
गौरतलब है कि बीते 24 अप्रैल को दोपहर में लंच कर रहे 99 जवानों पर बुरकापाल इलाके के नजदीक नक्सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले में 25 जवानों की मौत हो गई थी और नक्सली भारी मात्रा में हथियार लूटने में सफल रहे थे। इस टीम के कमांडर, सहायक कमांडेंट जे विश्वनाथ थे। घटना के जांच की प्राथमिक रिपोर्ट में विश्वनाथ पर ‘नेतृत्व की स्पष्ट कमी’ के आरोप सामने आए हैं।
कुछ और अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय के निर्देशों पर सीआरपीएफ कुछ और अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। ऐसी संभावना इसलिए बन रही है क्योंकि सीआरपीएफ ने हाल ही में गृहमंत्रालय को हमले की बाबत एक रिपोर्ट सौंपी है। सीआरपीएफ के नवनियुक्त महानिदेशक आरआर भटनागर भी ऑपरेशनल तैनातियों को लेकर आमूलचूल बदलाव के निर्देश दे चुके हैं।