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Rath Yatra 2023: 'जय जगन्नाथ' के नारों से गूंजा पुरी, रथ यात्रा में जुटे लाखों भक्त; PM-राष्ट्रपति ने दी बधाई

Tue, 20 Jun 2023 06:37 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और अन्य लोगों ने रथ यात्रा के अवसर पर भक्तों को बधाई दी है। जिला प्रशासन ने गर्मी और उमस को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
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पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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भगवान जगन्नाथ और उनके दो भाई-बहनों के विशालकाय रथों को मंगलवार को उनके वैकल्पिक निवास तक ले जाया गया। लोग इन रथों को तीर्थ शहर के बीचोंबीच 12वीं सदी के एक पत्थर के मंदिर से खींचकर दो किलोमीटर दूर ले गए। सूर्यास्त के समय हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के करीब 45 फीट लंबे लकड़ी के रथों को खींचा। इस दौरान लाखों श्रद्धालु जुलूस में शामिल होने, प्रार्थना करने और देखने के लिए उमड़ पड़े। 

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राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी रथ की रस्सियों को खींचा
राज्यपाल गणेशी लाल और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रतीकात्मक रूप से प्रमुख जगन्नाथ रथ को जोड़ने वाली रस्सियों को खींचकर अभ्यास शुरू किया। लयबद्ध रूप से पीतल के झांझ और हाथ से ड्रम बजाते हुए पुजारियों ने रथों पर देवताओं के लिए घेरा बनाया, क्योंकि जुलूस इस मंदिर शहर की मुख्य सड़क से होकर अपना धीमा और सर्पाकार रास्ता बना रहा था।

रथयात्रा में लाखों भक्तों के जुटने का अनुमान
इस दौरान पूरा शहर 'जय जगन्नाथ' और 'हरिबोल' के नारों से गूंजा। अधिकांश हिंदुओं, खासतौर पर वैष्णवों ने इस पवित्र अवसर की झलक पाने की कोशिश की। इस वार्षिक उत्सव में शहर के करीब एक लाख से ज्यादा भक्तों के जुटने का अनुमान है। इससे पहले दिन में पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देब ने मंगलवार को रस्मी तौर पर स्वर्ण हैंडल वाले झाड़ू के साथ रथों को आगे बढ़ाया, वहीं पुजारियों ने रथ पर सुंगधित फूल और पानी छिड़का। जुलूस शुरू होने से पहले विभिन्न समूहों ने 'कीर्तन' (धार्मिक गीत) किए और रथों के सामने नृत्य किया।  जिला प्रशासन और पुलिस ने उत्सव को सफल बनाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

कब आयोजित होती है वार्षित रथ यात्रा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह वार्षिक रथ जात्रा (जो भगवान जगन्नाथ के नौ दिवसीय प्रवास को चिह्नित करती है) हर साल आषाढ़ (जून-जुलाई) के महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि (पूर्णिमा के बाद पखवाड़ा) को आयोजित की जाती है। पुरी के मुख्य पुजारी द्वारा 'छेरा पाहनरा अनुष्ठान' पूरा करने के बाद रथ खींचना शुरू हुआ। लकड़ी के घोड़ों को रथों पर फिट किया गया था और सेवादार पायलटों ने भक्तों को रथों को सही दिशा में खींचने के लिए निर्देशित किया।

'समय से पहले कर लिए गए सभी अनुष्ठान'
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के रंजन कुमार दास ने कहा, भगवान की देखभाल करने वाले सेवादारों सहित सभी में उत्साह देखा जा सकता है और अनुष्ठान समय से पहले पूरे कर लिए गए। उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र मंदिर से बाहर आने वाले पहले व्यक्ति थे, उसके बाद सुभद्रा और बाद में भगवान जगन्नाथ खुद थे। भगवान बलभद्र को तालद्वाज रथ पर बैठाया गया, भगवान जगन्नाथ के लिए नंदीघोष नामक रथ को सजाया गया, चक्र राज सुदर्शन को लेडी सुभद्रा के दरपदलन रथ पर बैठाया गया। जुलूस की शुरुआत में पुरी के शंकराचार्य स्वामी निशाचालानंद सरस्वती भी मौजूद थे।
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राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और अन्य लोगों ने रथ यात्रा के अवसर पर भक्तों को बधाई दी है। जिला प्रशासन ने गर्मी और उमस को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

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