भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ सौ संस्थानों से मुकाबले के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किए हैं। पीएमओ की इस ड्रीम प्रोजेक्ट में अब फैकल्टी की सारी सीट भरने की तय समय सीमा तीन साल को बढ़ा कर पांच साल कर दिया गया है।
विश्व स्तरीय संस्थान बनाने के लिए नियमों में बदलाव की सिफारिशों पर बुधवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में बैठक होगी। इस बैठक में नियमों में ढील की सिफारिश पर मुहर लग जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक विश्व स्तरीय संस्थान के लिए देशभर से 20 शिक्षण संस्थान चुने जाएंगे। संस्थानों में फैकल्टी नियुक्त करने की पहले तीन साल की समय सीमा रखी गई थी, जिसे बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। अभी बीस छात्रों पर एक फैकल्टी होती है और नए नियमों के तहत दस छात्रों पर एक फैकल्टी होगी।
इसके अलावा पहले की सिफारिशों के मुताबिक शिक्षण संस्थान में बीस हजार छात्र होने चाहिए थे, जो अब पंद्रह हजार की सीमा तय की गई है।
इसके अलावा सरकारी व सहायता प्राप्त संस्थानों को पहले पांच सालों के लिए पांच सौ करोड़ रुपये दिए जाने थे, जिसे बढ़ाकर एक हजार करने की सिफारिश की गई है। समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि मेडिकल संस्थान का अधिकार एमसीआई के पास ही रहे। हालांकि यूजीसी के अधिकार कम हो जाएंगे।
यूजीसी की भूमिका सिर्फ नियम बनाने तक रहेगी, प्रशासकीय नहीं। समिति ने यह भी साफ कर दिया है कि यह प्रोजेक्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय का है, जिसे पीएमओ निगरानी कर रहा है। इसमें नीति आयोग का कोई दखल नहीं है।