मिशन चंद्रयान का काउंटडाउन शुरू
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से शुक्रवार को उड़ान भरने से पहले मिशन के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती गुरुवार को भारतीय समयानुसार 14:35:17 बजे शुरू हुई। अंतरिक्ष यान को जीएसएलवी मार्क-3 (एलवीएम 3) हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल पर लॉन्च किया जाएगा। इसरो का यह फॉलो-अप प्रयास होगा, क्योंकि इससे पहले चंद्रयान-2 मिशन को 2019 में अपनी सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
इसरो के वैज्ञानिकों ने मंदिर में की पूजा-अर्चना
पूरी प्रक्षेपण तैयारी और प्रक्रिया का पालन करते हुए इसरो का 'लॉन्च रिहर्सल' समाप्त हो चुका है। मिशन की लॉन्चिंग से एक दिन पहले इसरो के वैज्ञानिकों की एक टीम ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के तिरुपति वेंकटचलपति मंदिर के भी दर्शन किए और चंद्रयान-3 के लघु मॉडल के साथ पूजा-अर्चना की। अगर सब कुछ ठीक रहा तो चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान होगा, जो भारत के तकनीकी कौशल और साहसिक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित करेगा।
'देश में अंतरिक्ष विज्ञान के विकास की बढ़ेगी क्षमता'
भारत के इस महत्वकांक्षी मिशन की लॉन्चिंग से पहले इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने कहा कि इसके सफल लैंडिंग से भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा और इससे देश में अंतरिक्ष विज्ञान के विकास की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे भारत को वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में 600 अरब डॉलर के कारोबार में भारत की हिस्सेदारी महज दो फीसदी है।
'अधिक स्टार्टअप की गुंजाइश भी बढ़ाएगा'
नारायणन ने कहा कि चूंकि भारत अब प्रौद्योगिकी विकास में निजी भागीदारी को आमंत्रित कर रहा है, इसलिए यह इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए और अधिक स्टार्टअप की गुंजाइश भी बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, 'कई खिलाड़ियों के लिए अपना काम शुरू करना काफी मायने रखता है। उदाहरण के लिए, मैं कल्पना करूंगा कि कई स्टार्टअप आएंगे, और यहां तक कि हमारे पास जो स्टार्टअप हैं, उनके पास बेहतर फंडिंग होगी। कई अन्य देश भी अपने स्टार्टअप के साथ यहां आ सकते हैं या मौजूदा स्टार्टअप में जुड़ सकते हैं।'
'देश की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन'
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन का सफल होना अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन होगा। चंद्रयान -2 चंद्रमा पर उतरने में कामयाब रहा, लेकिन कुछ सॉफ्टवेयर और यांत्रिक मुद्दों के कारण सॉफ्ट लैंडिंग करने में विफल रहा। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि अब उन्होंने चार साल तक इसके हर पहलू पर काम किया है और सॉफ्ट लैंडिंग करने की उम्मीद कर रहे हैं।
'स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकी जरूरी'
नारायणन ने कहा कि देश के जीवित रहने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसरो अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों के लिए न्यूनतम राशि का इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा, अन्य देशों की तुलना में इस तरह के अभियानों के लिए हमारा खर्च बहुत कम है। नारायणन ने कहा कि हमें मिशन की सफलता जानने के लिए 23 या 24 अगस्त तक इंतजार करना होगा क्योंकि लैंडिंग उन तारीखों पर होगी।