देश का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मैग्नीशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिजों को खोजने का प्रयास करेगा। वह चांद के वातावरण और इसके वजूद से संबंधित आंकडे़ जुटाएगा। चंद्रयान-2 का सबसे खास मिशन वहां पानी या उसके संकेतों की खोज होगी।
अगर चंद्रयान-2 यहां पानी के सबूत खोज पाता है तो यह अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक बड़ा कदम होगा। पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था होगी तो चांद पर बेस कैंप बनाए जा सकेंगे, जहां चांद से जुड़े शोधकार्य के साथ-साथ अंतरिक्ष से जुड़े अन्य मिशन की तैयारियां भी की जा सकेंगी। अंतरिक्ष एजेंसियां मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए चांद को लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल कर पाएंगी। इसके अलावा यहां पर जो भी खनिज पदार्थ होंगे, उनका भविष्य के मिशन में इस्तेमाल कर सकेंगे।
यहां से रखी जा रही है नजर
चंद्रयान-2 पर बंगलूरू स्थित इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क के साथ बायलालू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क से नजर रखी जा रही है। यहां पर मौजूद करीब 100 वैज्ञानिकों की टीम मिशन पर निगरानी के साथ-साथ उसे तय योजना के मुताबिक लक्ष्य तक पहुंचने को अंजाम देने में बीते 48 दिनों से दिन-रात लगी हुई है।