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चंद्रयान-2: धरती से चांद तक कैसे पूरा किया सफर

Fri, 06 Sep 2019 02:20 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चंद्रयान- 2 - फोटो : ISRO
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इंसान के पहली बार चांद पर उतरने की 50वीं वर्षगांठ पर चंद्रयान- 2 का रोवर विक्रम चांद की धरती पर कदम रखेगा। आंध्र प्रदेश से सटे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने वाला यह मिशन अंतरिक्ष की दुनिया में भारत का डंका बजा रहा है। विक्रम के चांद की धरती को छूते ही भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा जो चांद तक पहुंचा है। बता दें कि, अपोलो 11 मिशन के जरिए नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने आज से 50 साल पहले चांद की जमीन पर कदम रखा था।
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इसरो ने 3,84,400 किलोमीटर (2,40,000 मील) की यात्रा के लिए 'चंद्रयान 2' को तैयार करने में 960 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस मिशन से पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा के रहस्यों को जानने में न सिर्फ भारत को मदद मिली बल्कि दुनिया के वैज्ञानिकों के ज्ञान में भी विस्तार होगा। जानिए अब तक के सफर के बारे में:

22 जुलाई 2019: चंद्रयान-2 को इसरो के अबतक के सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी मॉर्क 3 द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया। यह तीन चरणों वाला रॉकेट था जिसने चंद्रयान-2 को चंद्रमा के रास्ते के पास तक पहुंचाया।
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24 जुलाई 2019: चंद्रयान-2 ने धरती की पहली परिक्रमा पूरी की। इस दौरान यान के इंजन को 48 सेकेंड के लिए चलाया गया था। 

24 जुलाई से 6 अगस्त: इस दौरान चांद की तरफ बढ़ते हुए चंद्रयान-2 ने चार और परिक्रमा को पूरा किया। इस दौरान चंद्रयान-2 का परिक्रमा पथ 230 किमी गुणा 45163 किमी से लेकर 276 किमी गुणा 142975 किमी तक रहा।

20 अगस्त 2019: चंद्रयान-2 अर्थ ऑर्बिट से निकलकर लूनर ऑर्बिट में प्रवेश किया। लूनर ऑर्बिट में चंद्रयान-2 का पहला परिक्रमा पथ 118 किमी गुणा 4412 किमी का था।

2 सितंबर 2019:  चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम सफलतापूर्वक अलग हुआ। इसके साथ ही उसने चांद की परिक्रमा शुरू कर दी। हर परिक्रमा के साथ लैंडर विक्रम चांद के नजदीक जाता रहा। 

7 सितंबर 2019: इस दिन अल सुबह लैंडर विक्रम चांद की सतह को छूएगा। इस दौरान चांद की सतह को छूने के ठीक पहले विक्रम में लगे इंजन को 6.5 सेकेंड के लिए चलाया जाएगा।

जानिए अमेरिका, रूस और चीन के चंद्रमिशन के बारे में

चंद्रयान- 2 - फोटो : इसरो
मिशन देश  तारीख
लूना 2  सोवियत रूस 12 सितंबर 1959
लूना 9 सोवियत रूस 31 जनवरी 1966
सर्वेयर 1 संयुक्त राज्य अमेरिका 30 मई 1966
लूना 13 सोवियत रूस 21 दिसंबर 1966
सर्वेयर 3 संयुक्त राज्य अमेरिका 17 अप्रैल 1967
सर्वेयर 5  संयुक्त राज्य अमेरिका 8 सितंबर 1967
सर्वेयर 6 संयुक्त राज्य अमेरिका 9 नवंबर 1967
सर्वेयर 7 संयुक्त राज्य अमेरिका 7 जनवरी 1968
अपोलो 11 संयुक्त राज्य अमेरिका 16 जुलाई 1969
अपोलो 12 संयुक्त राज्य अमेरिका 14 नवंबर 1969
लूना 16 सोवियत रूस 12 सितंबर 1970
लूना 17 सोवियत रूस 10 नवंबर 1970
अपोलो 14 संयुक्त राज्य अमेरिका 31 जनवरी 1971
अपोलो 15 संयुक्त राज्य अमेरिका 26 जुलाई 1971
लूना 10 सोवियत रूस 14 फरवरी 1972
अपोलो 16 संयुक्त राज्य अमेरिका 16 अप्रैल 1972
अपोलो 17 संयुक्त राज्य अमेरिका 7 दिसंबर 1972
लूना 21 सोवियत रूस 8 जनवरी 1973
चैंगे 3 चीन 1 दिसंबर 2013
चैंगे 4 चीन 7 दिसंबर 2018



 

इतना है ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर का वजन

चंद्रयान- 2 - फोटो : इसरो
चंद्रयान-2 का कुल वजन 3859 किलोग्राम है। जिसमें आठ पेलोड्स के साथ ऑर्बिटर का वजन 2379 किलोग्राम है। इसके अलावा लैंडर विक्रम का वजन चार पेलोड्स के साथ 1471 किलोग्राम है जबकि रोवर प्रज्ञान का वजन 27 किलोग्राम है।  

चंद्रयान-2 का उद्देश्य
मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह में मौजूद तत्वों का अध्ययन कर यह पता लगाना कि उसके चट्टान और मिट्टी किन तत्त्वों से बनी है। वहां मौजूद खाइयों और चोटियों की संरचना का अध्ययन। चंद्रमा की सतह का घनत्व और उसमें होने वाले परिवर्तन का अध्ययन। ध्रुवों के पास की तापीय गुणों, चंद्रमा के आयनोस्फीयर में इलेक्ट्रानों की मात्रा का अध्ययन। चंद्रमा की सतह पर जल, हाइड्रॉक्सिल के निशान ढूंढने के अलावा चंद्रमा के सतह की थ्रीडी तस्वीरें लेना।

1972 के बाद कोई चांद पर क्यों नहीं गया
21 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद पर कदम रखकर इतिहास रच दिया था। इसके बाद पांच और अमेरिकी अभियान चांद पर भेजे गए थे। साल 1972 में चांद पर पहुंचने वाले यूजीन सेरनन आखिरी अंतरिक्ष यात्री थे और उनके बाद अब तक कोई भी इंसान चांद पर नहीं गया है। अब सवाल उठता है कि अमेरिका या किसी और देश ने करीब आधी सदी तक चांद पर किसी अंतरीक्षयात्री को क्यों नहीं भेजा?

बजट का पेंच
दरअसल चांद पर किसी इंसान को भेजना एक महंगा सौदा है। लॉस एंजेलिस के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में खगोल विज्ञान के प्रोफेसर माइकल रिच कहते हैं कि चांद पर इंसानी मिशन भेजने में काफी खर्च आया था, जबकि इसका वैज्ञानिक फायदा कम ही हुआ। इस मिशन में वैज्ञानिक दिलचस्पी कम थी और राजनीतिक कारण ज्यादा थे। इंसानी मिशन के पीछे बड़ी वजह राजनीति और अंतरिक्ष पर नियंत्रण की होड़ थी।

साल 2004 में अमेरिका के तत्कालिन राष्ट्रपति डब्ल्यू जॉर्ज बुश ने इंसानी मिशन भेजने का प्रस्ताव पेश किया था। इसमें 104,000 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुमानित बजट बनाया गया। लेकिन भारी-भरकम बजट के चलते उस वक्त भी ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था।
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अमेरिका ने अपोलो मिशनों पर खर्च किए हैं 25 अरब अमेरिकी डॉलर

चंद्रयान-2 मिशन - फोटो : PTI
अमेरिका ने अपने 15 अपोलो मिशनों पर 25 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं, जो आज के मूल्यों के लिहाज से लगभग 100 अरब डॉलर होते हैं। इन मिशनों में वे छह मिशन भी शामिल हैं, जिनके जरिये नील आर्मस्ट्रॉन्ग तथा अन्य अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा पर उतारा गया। 

चीन ने 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर किए खर्च
चीन ने चंद्रमा पर भेजे जाने वाले अपने चैंगे 4 यान पर 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं। इनके अलावा 1960 और 1970 के दशक में चलाए गए चंद्रमा से जुड़े अभियानों पर आज के मूल्यों के लिहाज से 20 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए।
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