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निजता के अधिकार का दावा नहीं कर सकते आतंकी: केंद्र सरकार

Wed, 23 Oct 2019 05:12 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुफ्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
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केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आतंकी या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोग निजता केअधिकार का दावा नहीं कर सकते। सरकार ने फेसबुक, ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म को लेकर नए नियमों की चल रही कवायद को सही करार दिया है।

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केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ केसमक्ष कहा कि आतंकी व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों केखतरों से निपटने के लिए सरकार नियमों में बदलाव करने जा रही है। ऐसा करना बड़े जनहित है। मेहता ने कहा, सरकार आम नागरिकों के निजता में दखल नहीं देने जा रही है लेकिन क्या आतंकी, निजता का दावा कर सकते हैं, मैं ऐसा नहीं समझता।’

सॉलिसिटर जनरल ने यह बात इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान की दलीलों के बाद दिया। दीवान का कहना था कि ऐसा कोई भी प्रयास नहीं होना चाहिए जिससे कि सोशल मीडिया पर अकाउंट के नाम पर व्यक्ति से निजी जानकारी मांगी जाती हो।
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सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक द्वारा दायर की गई याचिका को स्वीकार कर लिया

आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक द्वारा उस याचिका को स्वीकार कर लिया कि जिसमें सोशल मीडिया अकाउंट खोलने केलिए व्यक्ति के प्रोफाइल से संबंधित जानकारी मांगने से संबंधित मामले को लेकर मद्रास सहित बअन्य हाईकोर्ट में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट  में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित सभी तमाम मामलों पर अगले वर्ष जनवरी में सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

वहीं तमिलनाड़ सरकार की ओर से  पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने में कोई आपत्ति नहीं है। इससे पहले राज्य सरकार ने फेसबुक की ट्रांसफर याचिका का विरोध किया था।

वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया कंपनियों को देश में नहीं आना चाहिए अगर वह सहयोग करने के लिए तैयार नहीं है। कंपनियां वैसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकते अगर वह डिसक्रिप्शन मुहैया नहीं कराते। कंपनियां बिना इस तरह के सिस्टम केदेश में नहीं आ सकती क्योंकि वे भी कानून के दायरे मेंआते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टा हम इससे सहमत नहीं है। हम तकनीकी रूप से इतना सक्षम नहीं है। हर मिनट तकनीक में इजाफा हो रहा है।

फेसबुक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण मसला है। इस तरह का मामला कई हाईकोर्ट में लंबित है। साथ ही निजता केअधिकार को लेकर नौ सदस्यीय संविधान पीठ का फैसला भी है। कानून का यह मतलब नहीं है कि उसकी चाबी कानून का पालन करवाने वाली एजेंसी के पास होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इससे लोगों की निजता प्रभावित होती है तो इसमें संतुलन होना चाहिए।
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