अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने विक्रम के अलगाव को मायके से ससुराल के लिए रवाना होने जैसा बताया है। बताया जा रहा है कि विक्रम के अलग होने के लिए जो वक्त तय किया गया था, उसी समय पर यह अलगाव हुआ। अलगाव की प्रक्रिया में उसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जैसे लड़ाकू विमान में खराबी आने के बाद कोई पायलट अपनी जान बचाने के लिए इजेक्ट होने के लिए करते हैं।
ऑर्बिटर प्रयोगों को देगा अंजाम
इसरो के मुताबिक, विक्रम के अलगाव की प्रक्रिया को कामयाब बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने धरती से उस पर पूरी तरह काबू बनाए रखा। अलगाव के बाद ऑर्बिटर करीब सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए कई प्रयोगों को अंजाम देगा। वैज्ञानिकों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यान के आर्बिटर को भी नियंत्रित करने की होगी। एक साथ आर्बिटर और विक्रम की सटीकता के लिए काम करते रहना होगा।
इसरो ने कुशीनगर, बस्ती के छात्रोें का जताया आभार
इसरो ने 15 अगस्त और रक्षा बंधन के मौके पर उसे भेजे गए हाथों से बनाई हुई ग्रीटिंग को लेकर आभार जताया है। इसरो ने ग्रीटिंग की तस्वीरें ट्विटर पर पोस्ट करते हुए कहा, हम केंद्रीय विद्यालयों के बच्चों की ऐसी कोशिशों से बेहद प्रभावित हैं। जिन छात्रों ने ये ग्रीटिंग भेजी है, उनमें असम के नगांव स्कूल, यूपी के बस्ती और कुशीनगर के केंद्रीय विद्यालयों के छात्र भी हैं।